Weekend Sleep Myth: वीकेंड पर 12 घंटे सोने से पूरी नहीं होती नींद, जानिए क्यों खतरनाक है स्लीपिंग पैटर्न बिगड़ना
“बस एक एपिसोड और.. बस एक रील और” — यह आज की डिजिटल लाइफस्टाइल का वह सच है जो रात के 12 बजे शुरू होकर घड़ी में दो-तीन बजा देता है. बेंगलुरु के एक टेक पार्क में काम करने वाले 26 साल के राहुल की तरह करोड़ों लोग रात 2 बजे सोते हैं, सुबह 7 बजे उठते हैं और वीकेंड पर 10-12 घंटे सोकर नींद पूरी करने का भ्रम पालते हैं. लेकिन शरीर के लिए नींद कोई ऐसा बैंक लोन नहीं है जिसे शनिवार और रविवार को एक साथ चुकता किया जा सके, बल्कि यह रोज की एक अनिवार्य जरूरत है.
📊 2. लोकलसर्कल्स और वेकफिट के सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे, 59% भारतीयों को नहीं मिल पा रही 6 घंटे की भी लगातार नींद
कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकलसर्कल्स के साल 2025 के ‘हाउ इंडिया स्लीप्स’ सर्वे (348 जिलों के 43 हजार से अधिक लोग) में यह बात सामने आई कि 59% लोगों को रात में 6 घंटे से भी कम की लगातार नींद मिल पाती है, जिनमें से 20% लोग तो मात्र 4 घंटे ही सो पाते हैं. वहीं, वेकफिट के ‘ग्रेट इंडियन स्लीप स्कोरकार्ड 2025’ के मुताबिक 58% भारतीय रात 11 बजे के बाद सोते हैं और 44% सुबह उठने के बाद फ्रेश महसूस नहीं करते.
📱 3. बिंज वॉचिंग और सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग में उलझ रहा ब्रेन, लगातार कम नींद से सुस्त हो रही है सोचने की क्षमता
मनोवैज्ञानिक सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद करने की सलाह देते हैं क्योंकि 10 मिनट का स्क्रॉल कब एक घंटे में बदल जाता है पता ही नहीं चलता. लगातार बदलती स्क्रीन लाइट ब्रेन को एक्टिव रखती है. सीडीसी (CDC) के अनुसार 18 से 60 वर्ष के वयस्कों को कम से कम 7 घंटे की नींद चाहिए. स्टडी बताती है कि लंबे समय तक जागने या कम सोने से रिस्पांस स्पीड 50% तक धीमी हो जाती है, जिससे हमारा फोकस, मूड और कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित होते हैं.
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