Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई ‘भारत टैक्सी’, जानिए यात्रियों और ड्राइवरों की समस्याएं
चंडीगढ़ में ओला, उबर, रैपिडो और एंड्रिवे जैसी प्रमुख ऐप आधारित कैब कंपनियों के लाइसेंस निलंबित होने के बाद शहर का परिवहन समीकरण पूरी तरह बदल चुका है. इन कंपनियों के बाहर होने के बाद सहकारी मॉडल पर आधारित ‘भारत टैक्सी’ को एक नए विकल्प के रूप में उतारा गया है. सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को शहर में कैब का विकल्प तो मिल गया है, लेकिन अब इसके बढ़े हुए किराए को लेकर सवाल उठने लगे हैं और यात्री पुराने समय की ओला-उबर सेवाओं से इसकी तुलना कर रहे हैं.
📉 2. सीमित विकल्पों के कारण बढ़ी भारत टैक्सी की भूमिका, लेकिन यात्रियों को जेब पर भारी पड़ रहा सफर
चार प्रमुख एग्रीगेटरों के लाइसेंस रद्द होने के बाद यात्रियों के पास विकल्प काफी सीमित रह गए हैं, जिससे भारत टैक्सी की जिम्मेदारी और मांग दोनों बढ़ गई हैं. चंडीगढ़ में रोजाना करीब एक लाख लोग ऐप आधारित कैब का इस्तेमाल करते हैं. यात्रियों का कहना है कि कैब सुविधा किफायती होनी चाहिए, लेकिन कम विकल्प होने के कारण उन्हें कई रूटों पर उम्मीद से ज्यादा किराया चुकाना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
🤝 3. सहकारी मॉडल से ड्राइवरों को बड़ी उम्मीदें, लेकिन कम बुकिंग और ट्रिप न मिलने से बढ़ रही है चिंता
जहां एक तरफ यात्री बढ़े हुए किराए से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत टैक्सी से जुड़े ड्राइवर कम बुकिंग मिलने की शिकायत कर रहे हैं. ड्राइवरों के मुताबिक प्लेटफॉर्म पर गाड़ियों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में ट्रिप नहीं मिल पा रही हैं. हालांकि, इस सहकारी मॉडल के तहत ड्राइवरों को कंपनी का हिस्सेदार बनाया गया है और नीति के अनुसार 25 रुपये प्रति किलोमीटर का बेस रेट तथा कुल किराए का 80 प्रतिशत हिस्सा ड्राइवरों को मिलने का प्रावधान है, जिससे उन्हें भविष्य में बेहतर कारोबार की उम्मीद है.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.