EC Voter List SIR Row: दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान; कांग्रेस बोली- ‘ज्ञानेश कुमार मनमानी कर रहे’
रायपुर। मतदाता गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद की खबरें सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। निर्वाचन आयोग के तीन सदस्यों में से दो चुनाव आयुक्तों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को लिखित आपत्तियां दर्ज कराने और उन पर सुनवाई न होने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस मुद्दे पर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे फर्जी/गलत मतदाताओं के नाम छांटने की एक पारदर्शी नीतिगत प्रक्रिया बताया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त पर निष्पक्ष न रहने का आरोप जड़ा है।
🏛️ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले: ‘यह एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है, इसमें किसी तरह का विभेद नहीं’
इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यदि मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है और उसमें से अयोग्य अथवा गलत प्रविष्टियों को हटाया जा रहा है, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पुनरीक्षण का कार्य मतदाता सूची के सुदृढ़ीकरण और पारदर्शिता के लिए होता है, जो कि समय-समय पर चलने वाली एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा जो भी नीतियां या निर्णय लिए जाते हैं, वे सर्वसम्मति से ही तय होते हैं। कांग्रेस की आदत हर सुधारात्मक कदम को गलत नजरिए से देखने की रही है।
⚖️ उप मुख्यमंत्री अरुण साव का कांग्रेस पर हमला: ‘बिना मतलब का बखेड़ा खड़ा कर रही है कांग्रेस’
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि SIR प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम या भ्रांति फैलाने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमानुकूल की गई है और देश में पहली बार इस तरह का सर्वे नहीं हो रहा है। कांग्रेस के शासनकाल में भी इस तरह के पुनरीक्षण कार्य होते रहे हैं। उन्होंने आगे रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) भी इस विषय पर विचार कर अपना स्पष्ट निर्णय दे चुका है, इसके बावजूद कांग्रेस बेवजह का सियासी बखेड़ा खड़ा करने का प्रयास कर रही है।
📢 कांग्रेस का तीखा पलटवार: ‘दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों से उजागर हुई मनमानी’
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की टिप्पणियों से यह साबित हो गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार निष्पक्षता से काम नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने के दौरान 14 मौकों पर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा व्यक्त की गई लिखित आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया, जो आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज है।
📜 महाभियोग प्रस्ताव की दी चेतावनी: ‘संसदीय मर्यादा और संवैधानिक पद की गरिमा को पहुंचाया नुकसान’
सुशील आनंद शुक्ला ने आगे कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व में उठाए गए मुद्दे आज पूरी तरह सही साबित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 24 अप्रैल 2026 को विपक्ष के 73 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था, जो फिलहाल प्रक्रियाधीन है। उन्होंने दावा किया कि यदि संसद का आगामी विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो विपक्षी दल एकजुट होकर दोनों सदनों में उन्हें पद से हटाने के लिए पुन: महाभियोग प्रस्ताव लाएंगे।
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