Bhadohi Hospital Negligence: प्रसूता को नहीं किया भर्ती, सड़क पर हुआ प्रसव; डॉक्टर बर्खास्त और स्टाफ पर गिरी गाज
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था को उजागर करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) से तड़पती एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से कथित तौर पर मना कर बाहर भेज दिया गया।
अस्पताल परिसर से बाहर निकलते ही महिला की हालत और ज्यादा बिगड़ गई और उसने अस्पताल के मुख्य द्वार के समीप सड़क पर ही नवजात को जन्म दे दिया। खुले में प्रसव होने का यह सनसनीखेज मामला सामने आते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया, जिसके बाद त्वरित जांच बैठाकर जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
🛑 अस्पताल के बाहर जुटा लोगों का हुजूम: परिजनों ने लगाया लापरवाही का गंभीर आरोप
घटनाक्रम और प्रसूता की आपबीती:
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समय पर पहुंची थी पीड़िता: जोरई गांव की रहने वाली करीब 20 वर्षीय रानी प्रसव पीड़ा होने पर अपने परिजनों के साथ समय रहते ज्ञानपुर के महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल पहुंची थी।
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भर्ती करने से किया इनकार: पीड़िता के अनुसार, लेबर रूम में मौजूद स्टाफ ने उसकी नाजुक स्थिति को अनदेखा कर दिया और उसे भर्ती किए बिना ही बाहर जाने को कह दिया।
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सड़क पर हुआ प्रसव: जब वह दर्द से कराहते हुए अस्पताल गेट से बाहर निकल रही थी, तभी अचानक सड़क पर ही उसकी डिलीवरी हो गई। घटना के तुरंत बाद स्थानीय राहगीरों और आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
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समय पर इलाज का अभाव: पीड़िता और परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर अमानवीय व्यवहार और गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि डॉक्टरों ने उसे समय रहते एडमिट कर लिया होता, तो सड़क पर प्रसव जैसी शर्मनाक नौबत कभी नहीं आती।
🩸 ‘हीमोग्लोबिन मात्र 5 ग्राम था’: सीएमओ ने दी मेडिकल रेफरल और एंबुलेंस पर सफाई
प्रशासनिक और चिकित्सीय पक्ष का विवरण:
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कम हीमोग्लोबिन का हवाला: मामला तूल पकड़ने के बाद भदोही के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. संतोष कुमार चक ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में महिला का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 5 ग्राम पाया गया था, जो कि उच्च जोखिम (High-Risk) गर्भावस्था की श्रेणी में आता है।
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हायर सेंटर रेफर किया गया था: महिला की अत्यंत गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक डॉक्टरों ने उसे बेहतर गहन चिकित्सा के लिए पहले मिर्जापुर और उसके बाद वाराणसी स्थित बीएचयू (BHU) ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर किया था।
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एंबुलेंस से संपर्क नहीं: सीएमओ के अनुसार, परिजन समय रहते 102 सरकारी एंबुलेंस सेवा से समन्वय स्थापित नहीं कर पाए, जिसके चलते मरीज अस्पताल से बाहर निकलते ही सड़क पर डिलीवरी की स्थिति में पहुंच गई।
⚖️ डॉक्टर की सेवा समाप्त और वेतन पर रोक: लापरवाह कर्मचारियों पर गिरी कड़ी गाज
दोषी स्वास्थ्यकर्मियों पर की गई विभागीय कार्रवाई:
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ईएमओ की सेवा समाप्त: प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ ने त्वरित एक्शन लेते हुए जिला अस्पताल में तैनात आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी (EMO) डॉ. पंकज कुमार की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ का वेतन रोका: ड्यूटी पर लापरवाही बरतने के आरोप में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का सितंबर माह का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
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स्टाफ नर्स का तबादला: लेबर रूम में तैनात स्टाफ नर्स नीलम मौर्या को जिला अस्पताल से तत्काल हटाकर औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्थानांतरित कर दिया गया है।
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अनुपस्थित डॉक्टर और सीएमएस पर जांच: ड्यूटी के समय बिना पूर्व सूचना के नदारद पाई गईं वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलिमा धवन और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) के प्रशासनिक पर्यवेक्षण के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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शासन को भेजी गई रिपोर्ट: भदोही के जिलाधिकारी शैलेश कुमार ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए उत्तर प्रदेश शासन के स्वास्थ्य विभाग को विस्तृत गोपनीय पत्र भेज दिया है।
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