Ludhiana Crime News: डीसी और सीपी के बड़े सर्च ऑपरेशन के बावजूद लुधियाना की बिहारी कॉलोनी में खुलेआम बिक रहा नशा
लुधियाना: महानगर को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे व्यापक अभियानों और प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत थाना डिवीजन नंबर-7 के अधीन आती बिहारी कॉलोनी में सरेआम उजागर हो रही है। महज तीन दिन पहले ही शहर के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन और पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा के नेतृत्व में कई डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी और एसएचओ सहित भारी पुलिस बल ने बिहारी कॉलोनी को चारों तरफ से घेरकर नशा तस्करों में खौफ पैदा करने के लिए विशेष घेराबंदी व तलाशी अभियान चलाया था। हालांकि, आला अधिकारियों का काफिला लौटते ही नशा तस्करों पर इस बड़े सर्च ऑपरेशन का कोई असर देखने को नहीं मिला। मंगलवार रात इसी बिहारी कॉलोनी में एक बार फिर नशा बेचने और खरीदने वालों की खुलेआम कतारें लगी दिखाई दीं, जिससे पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
👥 अफसरों की भारी मौजूदगी के बावजूद बेखौफ नजर आए तस्कर
उल्लेखनीय है कि शहर में घोड़ा कॉलोनी के बाद अब बिहारी कॉलोनी को नशे का एक प्रमुख हॉटस्पॉट माना जाता रहा है, जहाँ संबंधित एसीपी और एसएचओ अपने स्तर पर समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाने का दावा करते रहे हैं। तस्करों की रीढ़ तोड़ने और उनमें कानून का खौफ पैदा करने के लिए हाल ही में डीसी और सीपी खुद भारी पुलिस अमले के साथ यहाँ की तंग गलियों में उतरे थे।
उस समय यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बड़े एक्शन के बाद तस्कर इलाका छोड़ देंगे या अपना अवैध धंधा बंद कर देंगे। इसके उलट, मंगलवार रात का नजारा बेहद चौंकाने वाला था; तस्कर पूरी तरह बेखौफ होकर गलियों में सक्रिय नजर आए और नशा खरीदने के लिए पहुंचने वाले युवकों का तांता लगा रहा।
🗣️ स्थानीय लोगों का आरोप, केवल छोटों पर कार्रवाई और बड़े तस्कर सुरक्षित
इलाके के स्थानीय निवासियों ने पुलिसिया रणनीति पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस का ध्यान केवल लती (नशे के आदी) हो चुके छोटे नशेडिय़ों पर कार्रवाई करने तक सीमित रहता है। लोगों का कहना है कि जब तक नशा बेचने वाले मुख्य सप्लायर और बड़े सौदागर खुलेआम घूमते रहेंगे, तब तक नशेड़ी यहाँ आते रहेंगे।
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भय का माहौल: आरोप है कि बड़े तस्करों पर ठोस कानूनी शिकंजा न कसे जाने के कारण वे कुछ ही घंटों के भीतर फिर से अपना जाल फैला लेते हैं। मंगलवार रात भी कई संदिग्ध युवकों को खुलेआम नशा सप्लाई करते देखा गया, जिससे मोहल्ले के संभ्रांत परिवारों, महिलाओं और बच्चों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है।
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पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल: बिहारी कॉलोनी के इस ताजा घटनाक्रम ने कमिश्नरेट पुलिस के नशा विरोधी अभियान की प्रभावशीलता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। जनता का सवाल है कि जिस इलाके में खुद डीसी और सीपी उतरे हों, वहाँ अगर नशा माफिया जड़ से नहीं उखाड़ा जा सका, तो अन्य संवेदनशील इलाकों में लगाम कैसे कसेगी? लोगों ने मांग की है कि अभियानों को केवल औपचारिक खानापूर्ति न बनाकर मुख्य तस्करों की पहचान की जाए और इलाके में 24 घंटे पक्की पुलिस पिकेट तैनात की जाए।
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