Madhya Pradesh News: जबलपुर में मेले के दौरान झूले में तकनीकी लापरवाही या युवकों की गलती? पुलिस ने मेला बंद कराकर शुरू की जांच
जबलपुर: शहर के शहीद स्मारक में इन दिनों एक मेला आयोजित किया जा रहा है, जिसमें इस बार एक नया और रोमांचक झूला आया है. इस झूले में एक बड़ा सा ड्रम होता है, जिसके भीतर लोग खड़े होते हैं और वह बहुत तेजी से गोल-गोल घूमता है. इसी तेज घुमाव की वजह से लोगों को इसका रोमांच पसंद आता है. लेकिन इसी दौरान घूमते-घूमते अचानक झूले का गेट खुल गया और उसमें से दो लोग नीचे आ गिरे. झूला बेहद रफ्तार में होने के कारण दोनों को बहुत गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे मेले को बंद करवा दिया.
⚠️ चलते झूले में रील बनाने के दौरान हुआ हादसा, मेला प्रबंधन और प्रत्यक्षदर्शियों के अपने दावे
मेले में घूमने गई सरिता यादव ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया, “मेरा बेटा भी उसी झूले के भीतर था और झूला बेहद तेजी से घूम रहा था. तभी अचानक घूमते-घूमते उसका गेट खुल गया और उसमें से दो लोग बाहर जा गिरे, जिसमें मेरा बेटा भी शामिल है जिसकी उम्र करीब 30 वर्ष है. उसकी हालत गंभीर होने के चलते उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक अन्य युवती भी बेहोशी की हालत में गंभीर चोटों के साथ अस्पताल में भर्ती है.” दूसरी ओर, मेला प्रबंधक एसके निगम का दावा है कि इसमें गलती उन दोनों लड़का-लड़की की ही थी, जो चलते हुए झूले के अंदर रील बना रहे थे और इसी वजह से यह दुर्घटना घटी. हालांकि, हादसा होते ही उन्होंने तुरंत मेले को बंद कर दिया और घायलों को इलाज के लिए भिजवाया.
🛡️ पुलिस ने मेला क्षेत्र को किया सील, झूलों की सुरक्षा और मानकों पर उठ रहे सवाल
इस दर्दनाक घटना के तुरंत बाद लाडगंज थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पूरे मेले को तुरंत खाली करवा लिया. पुलिस ने करीब 500 लोगों को झूले से बाहर निकलवाकर झूला संचालन पूरी तरह बंद करा दिया. सीएसपी अखिलेश गौर ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हमने इस पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है और इस बात की बारीकी से जांच की जा रही है कि आखिर इसमें किसकी लापरवाही थी, और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. गौर करने वाली बात यह है कि पहले मेलों में छोटे और पारंपरिक झूले लगते थे, लेकिन आजकल आधुनिक और भारी-भरकम झूले बेधड़क इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जहाँ सुरक्षा मानकों का पूरी तरह ध्यान नहीं रखा जाता है और परमिशन के दौरान भी इनकी तकनीकी जांच का कोई प्रावधान नहीं होता, जिसके चलते अक्सर ऐसी दुर्घटनाएं सामने आती हैं.
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