सनातनी विनोद कुमार बिंदल के संयोजन में रामलीला का भव्य समापन, श्रीराम के राजतिलक के साथ पूरी हुई रामकथा
विवेक विहार के श्री हनुमान बालाजी मंदिर में दशहरा पर रावण वध का मंचन, 10 दिवसीय आयोजन में दिखे रामायण के प्रमुख प्रसंग
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026 : असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा विवेक विहार स्थित श्री हनुमान बालाजी मंदिर में आयोजित रामलीला के समापन का विशेष अवसर बना। सनातनी विनोद कुमार बिंदल के संयोजन में आयोजित 10 दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन रावण वध और भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की प्रस्तुतियां हुईं। रामकथा के समापन पर जय श्रीराम के जयकारों के साथ धर्म और मर्यादा की महत्ता को रेखांकित किया गया।

11 अक्टूबर को आरंभ हुई रामलीला में रामायण के शुरुआती घटनाक्रमों को मंच पर प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीराम का जन्म, विश्वामित्र के साथ प्रस्थान, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और जनकपुर में सीता स्वयंवर के प्रसंगों ने दर्शकों को रामकथा से जोड़ा। विवाह समारोह और लक्ष्मण-परशुराम संवाद के जरिए शौर्य के साथ विनम्रता का संदेश भी दिया गया।

कथा के वनवास वाले हिस्से में कैकेयी संवाद, राम-लक्ष्मण-सीता का वन गमन, केवट प्रसंग और भरत मिलाप जैसे दृश्य शामिल रहे। आगे शबरी भेंट, पंचवटी, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और जटायु वध का मंचन किया गया। राम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध के बाद कथा ने लंका विजय की दिशा में कदम बढ़ाया।

हनुमान जी की लंका यात्रा, अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट, रावण दरबार में संवाद और लंका दहन जैसे दृश्यों ने रामायण के संघर्षपूर्ण चरण को जीवंत किया। इसके बाद विभीषण का भगवान श्रीराम की शरण में आना, सेतु निर्माण और अंगद का रावण को समझाने के लिए दरबार पहुंचना दिखाया गया। युद्ध के प्रसंगों में कुंभकर्ण, मेघनाद और अहिरावण वध को स्थान मिला।

दशहरा पर रावण वध के पश्चात भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के मंचन से रामलीला संपन्न हुई। इस धार्मिक आयोजन ने संदेश दिया कि अहंकार, अन्याय और अधर्म का अंत निश्चित है तथा सत्य और सदाचार की राह ही समाज को सही दिशा देती है। सनातनी विनोद कुमार बिंदल के संयोजन में हुए कार्यक्रम के जरिए रामायण के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को मंचीय स्वरूप में प्रस्तुत किया गया।