Gwalior News: नगर निगम की बैठक में डीपीसी पर जोरदार हंगामा, अपनों के विरोध के बाद 29 अक्टूबर तक सदन स्थगित
ग्वालियर: नगर निगम परिषद की ओर से शुक्रवार को बुलाई गई विशेष बैठक काफी हंगामेदार माहौल में संपन्न हुई। इस बैठक की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि डीपीसी (विभागीय पदोन्नति कमेटी) के मुद्दे पर पार्षदों के बीच जबरदस्त खींचतान और मतभेद देखने को मिले। नगर सरकार में बहुमत होने के बावजूद पार्षदों के आपसी विरोधाभास के कारण सदन की कार्रवाई को बीच में ही रोकना पड़ा।
शीतला माता मंदिर हादसे और विकास कार्यों पर होनी थी चर्चा
मूल रूप से इस बैठक का एजेंडा पार्षदों की सहमति से शीतला माता मंदिर हादसे के पीड़ितों के प्रति सहानुभूति प्रकट करने और आगामी दीपावली पर्व के मद्देनजर शहर की साफ-सफाई व व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के मुद्दों पर चर्चा करना था। पिछले दिनों हादसे में जान गंवाने वाले ग्वालियर के परिवारों को सहायता देने के प्रस्ताव पर भी बात की गई थी।
भाजपा पार्षद ने डीपीसी प्रक्रिया में लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
बैठक के दौरान अचानक मामला उस समय गरमा गया जब पदोन्नति से जुड़ा डीपीसी का विषय सदन में उठाया गया। भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास ने डीपीसी प्रक्रिया में गंभीर अनियमिताओं और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पदोन्नतियों के नाम पर भ्रष्टाचार और पैसों का लेनदेन किया गया है, जिससे योग्य कर्मचारियों को उनके हक से वंचित होना पड़ा है। इस खुलाse के तुरंत बाद भाजपा के ही अन्य पार्षदों ने इस मुद्दे का विरोध करना शुरू कर दिया।
सभापति ने बढ़ते मतभेदों के चलते 29 अक्टूबर तक टाली बैठक
सदन में बढ़ते गतिरोध और हंगामे को देखते हुए सभापति मनोज सिंह तोमर ने चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि डीपीसी एक बेहद महत्वपूर्ण विषय है। कुछ पार्षदों ने यह आपत्ति जताई थी कि जिन कर्मचारियों की विभागीय जांच लंबित थीं, उनकी पदोन्नति रोकी गई है जबकि अन्य को लाभ मिला है। किसी भी प्रकार के जल्दबाजी भरे निर्णय से बचने और सभी कमियों को दूर कर नियमानुसार पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के लिए इस बैठक को आगामी 29 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
न्यायालय में विचाराधीन मामले को उठाने पर उठी असहमति
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पार्षद अपर्णा पाटिल ने कहा कि जो मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, उसे सदन में चर्चा के लिए लाना न्यायसंगत नहीं है। उनका मानना था कि वर्तमान समय में शहर की जनता के लिए बिजली, पानी और त्योहार से जुड़ी अन्य मूलभूत समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना कहीं अधिक आवश्यक था।
अपने ही साथियों के विरोध पर बोले पार्षद बृजेश श्रीवास
जब सदन में डीपीसी का मुद्दा उठाने वाले पार्षद बृजेश श्रीवास से उनके ही दल के साथियों द्वारा विरोध किए जाने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने दो टूक कहा कि जिन लोगों के निजी स्वहित जुड़े होते हैं, वे ऐसी चर्चाओं से कतराते हैं। उन्होंने साफ किया कि उनका कोई व्यक्तिगत हित नहीं है और वे आगे भी डीपीसी की वास्तविकता और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।
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