Supreme Court Hearing on SIR: चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फैसलों पर टली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, अब 17 नवंबर को होगी अगली पेशी
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े चुनाव आयोग के विवादास्पद फैसलों और उसकी कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली महत्वपूर्ण याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर आगामी 17 नवंबर को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तौर-तरीकों और SIR से संबंधित तमाम नीतिगत फैसलों के खिलाफ विभिन्न पक्षों द्वारा शीर्ष अदालत में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इस बीच, चुनाव आयोग ने इस मामले में बीते सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करके अपने सभी निर्णयों का पूरी तरह से बचाव किया है। आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि SIR से जुड़े तीनों प्रमुख आदेश निर्वाचन आयोग के सभी सदस्यों की आपसी सहमति से ही पारित किए गए थे। चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त के ऊपर लगाए गए एकतरफा फैसले लेने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन तमाम याचिकाओं को पूरी तरह से निराधार करार दिया है।
राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी समेत अन्य विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर अब दिवाली के बाद होगी सुनवाई
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी तथा देश के अन्य विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेताओं की तरफ से दायर की गई इन तमाम याचिकाओं पर अब दीपावली के पावन पर्व के बाद ही सुनवाई की जाएगी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी है कि वे चुनाव आयोग द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे का अध्ययन करके अपना आधिकारिक जवाब कोर्ट में पेश करें, जिसके लिए उन्हें विधिवत समय प्रदान किया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष तीन सदस्यीय बेंच के समक्ष इस पूरे मामले की सुनवाई निर्धारित की गई थी।
वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मांगा जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिनों का अतिरिक्त समय
अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने बेंच को अवगत कराया कि चुनाव आयोग की तरफ से दाखिल किया गया हलफनामा उन्हें सुनवाई से ठीक एक दिन पहले ही प्राप्त हुआ है। ऐसी स्थिति में उस विस्तृत हलफनामे का कानूनी रूप से अध्ययन करके उसका ठोस जवाब तैयार करने और उसे अदालत में दाखिल करने के लिए कम से कम 10 दिनों का समय दिया जाना न्यायसंगत होगा। वकील के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने की अनुमति प्रदान कर दी और मामले की अगली सुनवाई को दिवाली के अवकाश के बाद के लिए स्थगित कर दिया।
चुनाव आयोग ने हलफनामा देकर खारिज किए आरोप, व्यक्तिगत जवाब आना अभी बाकी
इस पूरे कानूनी विवाद के तहत चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना आधिकारिक जवाब प्रस्तुत कर दिया है। आयोग ने याचिकाओं में लगाए गए तमाम गंभीर आरोपों का खंडन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों का पुरजोर बचाव किया है। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी की तरफ से अलग-अलग व्यक्तिगत जवाब दाखिल किया जाना अभी बाकी है। इससे पूर्व हुई पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से भी अलग-अलग नोटिस जारी किए थे।
SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची और फैसलों की पारदर्शिता पर उठाए गए हैं सवाल
दाखिला की गई इन याचिकाओं में मुख्य रूप से निर्वाचन आयोग की कार्यशैली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर लिए गए एकतरफा निर्णयों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पूरी प्रक्रिया में बरती गई कथित अनियमितताओं को पुरजोर तरीके से चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड, मतदाता सूची से नाम काटे जाने या हटाने की पूरी प्रक्रिया तथा उनके निर्णय लेने के तौर-तरीकों की गहराई से न्यायिक जांच कराई जाए। उनका मुख्य आरोप यह है कि आयोग द्वारा लिए गए कई फैसले चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और तटस्थता को लेकर देश भर में गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
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