कोल्हापुर गोकुल डेयरी चुनाव विवाद पर राहुल गांधी का बीजेपी पर बड़ा हमला, बोले— ‘दूध उत्पादकों के वोटों की हो रही है चोरी’
कोल्हापुर: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित प्रसिद्ध ‘गोकुल मिल्क कोऑपरेटिव’ (गोकुल डेयरी) के चुनाव परिणामों के बाद मचे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर कड़ा प्रहार किया है। राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य में सत्ता का दुरुपयोग करते हुए चुनाव संपन्न होने के बाद नियमों में फेरबदल कर रही है ताकि लोकतांत्रिक जनादेश को पलटा जा सके। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस समर्थित पैनल द्वारा चुनाव में बीजेपी समर्थित ‘महायुति’ गठबंधन को शिकस्त देने के बाद बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बहुमत हासिल करने के लिए नियमों को बदला गया है, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर “दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी” करार दिया है।
सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी का तंज, कहा— ‘बोर्ड में चार डायरेक्टर और ठूंसो, बहुमत चुराओ, किसान कभी नहीं भूलता’
अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक तीखी पोस्ट साझा करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लिखा, ‘गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया, तो भाजपा ने चुनाव के बाद तुरंत नियम बदल दिए। चार डायरेक्टर और ठूंसो, 12 को 16 बनाओ और अपना बहुमत चुराओ। यह सीधे तौर पर दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी और जनादेश के साथ खिलवाड़ है। भाजपा आज इतनी अधिक हताश हो चुकी है कि वह देश के हर कोने में अपनी सत्ता और वजूद बचाने के लिए किसी भी हद तक गिरने को तैयार है। दूध उत्पादकों का हक और वोट चुराने वाले यह बात अच्छी तरह याद रखें कि देश का किसान सब याद रखता है और वह कभी नहीं भूलता।’
पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र सरकार पर उठाए सवाल, बोले— चुने हुए बोर्ड को काम न देने के लिए कैबिनेट ने चार सरकारी डायरेक्टरों को नामित करने का लिया फैसला
इससे पहले कांग्रेस पार्टी के अन्य प्रमुख नेता पवन खेड़ा ने भी राज्य की महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ‘गोकुल मिल्क फेडरेशन’ में दूध उत्पादकों द्वारा दिए गए स्पष्ट और लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने के लिए बेहद बेशर्मी से कानूनी बदलावों का सहारा ले रही है और चुने हुए बोर्ड की मूल संरचना में मनमाने ढंग से फेरबदल कर रही है। बीते 19 अक्टूबर को संपन्न हुए चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले पैनल ने कुल 25 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज कर ‘महायुति’ की 12 सीटों के मुकाबले स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। हालांकि, जब महायुति समर्थित डायरेक्टर्स ने बैठक से दूरी बनाकर चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया को रोक दिया, तब बॉम्बे हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए 10 नवंबर को फिर से चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में कांग्रेस, कहा— क्या कोई सरकार सिर्फ इसलिए नियम बदल सकती है क्योंकि उसे चुनाव के नतीजे पसंद नहीं आए?
पवन खेड़ा ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए बोर्ड को स्वतंत्र रूप से काम करने देने के बजाय राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने रातोंरात चार अतिरिक्त सरकारी डायरेक्टरों को नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिन्हें मतदान करने का भी पूरा अधिकार होगा। इस कदम से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे और दूध उत्पादकों के फैसले को बलपूर्वक पलट दिया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई भी सरकार चुनाव संपन्न होने के बाद सिर्फ इसलिए नियम बदल सकती है क्योंकि उसे चुनावी परिणाम अपने अनुकूल नहीं लगे? कांग्रेस पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे सहकारिता संस्थाओं की स्वायत्तता और जनता के लोकतांत्रिक जनादेश की रक्षा के लिए इस पूरे मामले को देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद? 25 में से 13 सीटें जीतकर कांग्रेस समर्थित राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी ने हासिल किया था बहुमत
उल्लेखनीय है कि यह पूरा राजनीतिक विवाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी’ पैनल की शानदार जीत के बाद सतह पर आया है। इस पैनल की कमान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतेज पाटिल के हाथों में थी, जिसने कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (लोकप्रिय गोकुल डेयरी ब्रांड) के निदेशक मंडल के चुनाव में कड़े मुकाबले के बाद बहुमत का आंकड़ा पार किया था। इस चुनाव में कुल 25 सीटों पर मुकाबला हुआ था, जिसमें से सतेज पाटिल के पैनल ने 13 सीटों पर कब्जा जमाया था, जबकि बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी वाले ‘महायुति’ गठबंधन को 12 सीटों से संतोष करना पड़ा था। 19 अक्टूबर को घोषित हुए इन परिणामों को सत्ताधारी गठबंधन के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा था, जिसके बाद से ही सहकारिता के इस प्रतिष्ठित मैदान में वर्चस्व की जंग और अधिक तेज हो गई है।
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