हांसी सीआईए-1 के पांच पुलिसकर्मी निलंबित, ओडिशा में मुख्य सप्लायर की आत्महत्या के मामले में एसपी ने की बड़ी कार्रवाई
हांसी: हरियाणा के हांसी जिले से एक बड़ी और सख्त प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। हांसी के पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा ओडिशा में एक आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई आत्महत्या के मामले में गंभीर लापरवाही बरतने पर हांसी सीआईए-1 (CIA-1) की टीम में शामिल पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। जिन पुलिसकर्मियों पर यह कार्रवाई की गई है, उनमें पीएसआई कपिल, एसआई सम्मत, पीएचसी जोगेंद्र, पीएचसी अल्ताफ और कांस्टेबल मुकेश शामिल हैं।
कॉमर्शियल मात्रा में नशीले पदार्थों के मुख्य सप्लायर को पकड़ने ओडिशा गई थी पुलिस टीम, ट्रांजिट रिमांड के दौरान हुई घटना
हांसी के एसपी विनोद कुमार ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरी घटना का खुलासा किया। उन्होंने मीडिया को जानकारी दी कि दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान पुलिस के हाथ कमर्शियल क्वांटिटी (व्यापारीक मात्रा) के नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक मुख्य सप्लायर का सुराग लगा था, जो मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला था। इस शातिर तस्कर को दबोचने के लिए पीएसआई कपिल के नेतृत्व में एक पांच सदस्यीय विशेष पुलिस टीम को ओडिशा भेजा गया था। इस टीम ने वहां पहुंचकर तमाम स्थानीय कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और अदालत से आरोपी का ट्रांजिट रिमांड भी हासिल कर लिया था।
रात अधिक होने और थाना दूर होने के कारण आरोपी को एक जगह ठहराया गया था, बाथरूम जाने के दौरान उसने लगा लिया फंदा
पुलिस के अनुसार, घटना की रात जब ट्रांजिट रिमांड मिला तो काफी देर हो चुकी थी और संबंधित स्थानीय थाना वहां से काफी दूर था। ऐसी स्थिति में पुलिस टीम आरोपी को थाने ले जाने के बजाय किसी अन्य सुरक्षित ठहरने के स्थान पर ले गई। इसी दौरान आरोपी ने बाथरूम जाने की बात कही और अंदर जाकर फांसी का फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। आरोपी द्वारा आत्महत्या किए जाने की इस घटना के बाद पुलिस टीम की कार्यप्रणाली और उसकी निगरानी में हुई भारी चूक को उच्च अधिकारियों ने बेहद गंभीरता से लिया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, एसपी विनोद कुमार ने की पुष्टि
इस मामले पर बात करते हुए हांसी के एसपी विनोद कुमार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्पष्ट गाइडलाइंस के मुताबिक हिरासत में मौजूद किसी भी आरोपी की सुरक्षा और उसकी कड़ी निगरानी करना पुलिस दल का प्राथमिक दायित्व होता है। ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आरोपी को थाने में सुरक्षित रखने या किसी अन्य स्थान पर ठहराने के दौरान उसकी पुख्ता निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। इसी आधिकारिक कर्तव्य और जिम्मेदारी में गंभीर लापरवाही बरतने का दोषी पाए जाने के बाद पांचों पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की यह बड़ी कार्रवाई की गई है।
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