जालंधर में बेखौफ दौड़ रहे बिना नंबर और फिटनेस के वाहन, बिल्डिंग मैटेरियल ढोने वाले वाहन बन रहे लोगों की मौत का कारण
जालंधर: पंजाब के जालंधर शहर के भीतर विभिन्न सड़कों, मुख्य मार्गों, गलियों और घनी आबादी वाले मोहल्लों में निर्माण सामग्री (बिल्डिंग मैटेरियल) ढोने वाले व्यावसायिक वाहन आम नागरिकों की जान और माल के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। शहर में रेत, बजरी, मिट्टी, ईंटें, सरिया और लोहे जैसी भारी सामग्री की ढुलाई करने वाले अनगिनत वाहन बिना किसी नंबर प्लेट के, बिना जरूरी कानूनी दस्तावेजों के और सुरक्षा के बुनियादी इंतजामों को ताक पर रखकर सरेआम बेखौफ दौड़ रहे हैं। सबसे अधिक हैरानी और चिंता का विषय यह है कि इनमें से कई खतरनाक वाहनों को ऐसे अप्रशिक्षित चालक चला रहे हैं जिनके पास कोई वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक मौजूद नहीं है। इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय जिला प्रशासन की तरफ से इन लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ आज तक कोई ठोस या प्रभावी शिकंजा कसता हुआ दिखाई नहीं दिया है।
ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और टेम्पो रिहायशी इलाकों में मचा रहे तांडव, तेज रफ्तार और लापरवाही से राहगीरों की जान पर मंडरा रहा संकट
शहर के विभिन्न हिस्सों में बिल्डिंग मैटेरियल का कारोबार करने वाले कई व्यापारी अपनी सामग्री की सप्लाई के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अनधिकृत टेम्पो का बेधड़क इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर वाहन क्षमता से अधिक ओवरलोड होते हैं और बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन नंबर अथवा फिटनेस प्रमाण पत्र के सड़कों पर फर्राटा भरते रहते हैं। ये भारी वाहन केवल मुख्य मार्गों तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि तंग गलियों और बच्चों-बुजुर्गों से भरे रिहायशी मोहल्लों के भीतर तक पहुंच जाते हैं। इनकी अंधाधुंध रफ्तार और बेलगाम लापरवाही के कारण आए दिन सड़क पर चलने वाले राहगीरों, मासूम बच्चों और बुजुर्गों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है।
सरिया और लोहे की खतरनाक ढुलाई बन रही जानलेवा, पीछे बिना रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत के दौड़ रहे भारी वाहन
इन सबके बीच सबसे अधिक खौफनाक स्थिति सरिया और लोहे की ढुलाई करने वाले वाहनों की बनी हुई है। इन वाहनों पर लंबे-लंबे सरिए इस खतरनाक तरीके से लाद दिए जाते हैं कि वे वाहन के पिछले हिस्से से काफी दूर तक बाहर हवा में लटके रहते हैं। इन वाहनों पर न तो पीछे कोई रेडियम रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत लगा होता है और न ही सरिए के खुले तथा नुकीले सिरों पर सुरक्षा के लिए कोई पर्याप्त उपाय किए जाते हैं। रात के वक्त या फिर कम रोशनी के दौरान पीछे से आने वाले अन्य वाहन चालकों को इनका बिल्कुल अंदाजा नहीं लग पाता, और यह गंभीर लापरवाही किसी भी पल किसी बड़े और भीषण हादसे को न्योता दे सकती है।
हादसों के बावजूद प्रशासन की उदासीनता जारी, जनता का सवाल—छोटे वाहनों के चालान काटने वाली पुलिस इन पर मेहरबान क्यों?
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार के सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करने वाले वाहनों के कारण अतीत में भी कई गंभीर दुर्घटनाएं घटित हो चुकी हैं, और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में तो निर्दोष लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। इन सबके बावजूद इनकी विधिवत जांच, धड़ल्ले से चालान काटने और नियमों का कड़ाई से पालन करवाने के लिए ट्रैफिक पुलिस की तरफ से कोई नियमित या गंभीर कार्रवाई नजर नहीं आती है। आम जनता का तीखा सवाल यह है कि जब शहर के सामान्य वाहन चालकों द्वारा मामूली नियमों का उल्लंघन किए जाने पर भारी-भरकम चालान काट दिए जाते हैं, तो फिर बिना नंबर प्लेट, बिना लाइसेंस और जानलेवा तरीके से सामान लादकर घूमने वाले इन वाहनों के खिलाफ पुलिस सख्ती क्यों नहीं बरत रही है?
जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस से विशेष अभियान चलाने की पुरजोर मांग, बड़े हादसे से पहले कड़े कदम उठाने की अपील
शहर के परेशान नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन तथा ट्रैफिक पुलिस के उच्च अधिकारियों से जोरदार मांग की है कि बिल्डिंग मैटेरियल ढोने वाले सभी प्रकार के व्यावसायिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन, फिटनेस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की गहन जांच के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए। बिना वैध लाइसेंस गाड़ी चलाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा सरिया और अन्य भारी सामान की ढुलाई के दौरान सुरक्षा के सभी नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करवाया जाए। शहरवासियों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन को किसी भी बड़े हादसे के घटित होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते त्वरित और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सड़कों पर खुलेआम घूम रहे ये मौत के दूत किसी अन्य परिवार की खुशियां न उजाड़ सकें।
रेहड़ियों और रिक्शों पर भी लादा जा रहा भारी निर्माण सामान, यातायात व्यवस्था चरमराने से बढ़ रहा दुर्घटनाओं का खतरा
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ व्यापारी भारी-भरकम बिल्डिंग मैटेरियल की ढुलाई के लिए पारंपरिक रेहड़ियों और सामान ढोने वाले रिक्शों तक का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। इन छोटे और असंतुलित वाहनों में उनकी क्षमता से कई गुना अधिक सामान लादकर व्यस्ततम मुख्य सड़कों पर उतार दिया जाता है। इस तरह की मनमानी से न केवल शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है, बल्कि सड़क से गुजरने वाले अन्य तमाम लोगों की सुरक्षा भी हमेशा खतरे के साए में रहती है।
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