नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ा कदम, सुकमा और बीजापुर जिले मे खुले कुल 3 सुरक्षा कैंप

बीजापुर/सुकमा: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा के उद्देश्य से “नियद नेल्ला नार” योजना चल रही है. इसी के तहत लगातार सुरक्षा कैंप खोले जा रहे हैं. इसी बीच बीजापुर में एक और सुकमा जिले में 2 नए कैंप स्थापित किए गए हैं.
बीजापुर के दुर्गम इलाके में कैंप: 16 सितम्बर 2025 को बीजापुर जिले के अति नक्सल प्रभावित ग्राम पेददाकोरमा में कैंप की स्थापना की गई. इसकी जानकारी SP ने ETV भारत को दी. थाना बीजापुर का पेद्दाकोराम घने जंगलों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बरसाती मौसम के कारण बेहद दुर्गम इलाका माना जाता है. इसके बावजूद सुरक्षा बलों ने साहस और धैर्य का दिखाते हुए कैंप की स्थापना की है.
पेद्दाकोरमा में सुरक्षा एवं जन – सुविधा कैम्प की स्थापना की गई है. ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उनके गांव में ही मिल सके इसके लिए कैंप स्थापित किया गया है. साथ ही माओवादी के खात्मे एवं विकास की गति को भी कैंप तेज करेगा– डॉ जितेन्द्र कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक
मूलभूत सुविधा के लिए होगी आसानी: नए सुरक्षा कैम्प की स्थापना से क्षेत्र के ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं आसानी से मिलेगी. स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल, सड़क, पुल-पुलिया, मोबाइल नेटवर्क, आंगनबाड़ी केंद्र और पीडीएस दुकान बनेंगे.
बीजापुर में एक साल में 37 कैंप खुले: पेददाकोरमा समेत आसपास के पदेड़ा, पालनार, मुनगा जैसे गांव भी अब सड़क नेटवर्क से जोड़े जा सकेंगे. इस पहल से न केवल व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि युवाओं को शिक्षा और कौशल विकास का भी मार्ग मिलेगा. वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में कुल 37 सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं.
कैंप खुलने से क्या क्या फायदा?
- 496 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया
- 195 माओवादी मुठभेड़ में मारे गए
- 918 नक्सली गिरफ्तार किए गए.
- मूलभूत सुविधा के साथ मोबाइल टावर जैसी योजनाओं का तीव्र विस्तार हुआ.
ग्रामीणों ने भी किया स्वागत: पेददाकोरमा एवं आसपास के ग्रामीणों ने सुरक्षा कैम्प की स्थापना का स्वागत किया है. लोगों का मानना है कि अब उनके जीवन में शांति और विकास की नई दिशा तय होगी. सालों से माओवादी डर के साए में जी रहे इन ग्रामीणों के लिए यह पहल उम्मीद की किरण साबित हो रही है.
- सुकमा के कैंप के बारे में जानिए: नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर 2 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं. एक अधिकारी के मुताबिक, पुलिस ने 16 सितंबर को पलागुड़ा गांव में एक शिविर स्थापित किया था, जबकि दूसरा शिविर 20 सितंबर को गुंडराजगुडेम गांव में स्थापित किया गया.
योजना के तहत मिल रहा लाभ: एक अधिकारी ने बताया कि, योजना के तहत राज्य सरकार सुरक्षा शिविरों के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों में 17 विभागों की 52 योजनाओं और 31 सामुदायिक सुविधाओं का लाभ प्रदान कर रही है.
अधिकारी ने आगे कहा, कि, “केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 150वीं बटालियन पलगुडा में तैनात है, जबकि सीआरपीएफ की दूसरी बटालियन गुंडराजगुडेम में तैनात है. इनके साथ ही, जनवरी 2024 से अब तक जिले में 18 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए जा चुके हैं.
249 नक्सली मारे गए: राज्य में माओवादी समस्या का सफाया करने के लिए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रही है. एक आंकड़े के मुताबिक, इस साल अब तक अलग-अलग मुठभेड़ों में 249 नक्सली मारे गए हैं. इनमें से 220 नक्सली बस्तर संभाग में मारे गए हैं, जिसमें सुकमा सहित सात जिले शामिल हैं.





