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सतर्कता, आत्म-परीक्षण और जागरूकता: स्तन कैंसर से लड़ने की कुंजी

रायपुर। 21st October 2025: अक्टूबर महीने को दुनिया भर में “ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ” यानी स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसी अवसर पर रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल के वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रवि जायसवाल एक महत्वपूर्ण संदेश साझा करते हैं
“शुरुआती पहचान ही बचाव की सबसे बड़ी कुंजी है। अगर महिलाएँ सतर्क रहें, नियमित आत्म-परीक्षण करें और जागरूक हों, तो हज़ारों जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं।”

जागरूकता क्यों है ज़रूरी

भारत में महिलाओं में सबसे ज़्यादा पाया जाने वाला कैंसर स्तन कैंसर है। पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में यह बीमारी कम उम्र में यानी 30 से 40 साल की उम्र के बीच ज़्यादा देखने को मिलती है।
डॉ. जायसवाल बताते हैं, “आजकल हम देख रहे हैं कि भारत में कम उम्र की महिलाएँ भी स्तन कैंसर से प्रभावित हो रही हैं। इसलिए जागरूकता और नियमित स्क्रीनिंग बेहद ज़रूरी है।”
अच्छी बात यह है कि अगर कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो उसका इलाज पूरी तरह संभव है।

जोखिम के कारण

डॉ. जायसवाल के अनुसार, कुछ कारण ऐसे हैं जो स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं

परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा हो या जेनेटिक बदलाव (BRCA म्यूटेशन)

हॉर्मोनल कारण – जैसे जल्दी पीरियड्स शुरू होना, देर से मेनोपॉज़ आना या लंबे समय तक हॉर्मोनल गोलियों का उपयोग

जीवनशैली से जुड़े कारण – मोटापा, शराब, धूम्रपान और व्यायाम की कमी

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट या ब्रेस्ट इम्प्लांट – भले ही दुर्लभ हों, लेकिन इनके साथ भी थोड़ा जोखिम जुड़ा रहता है

डॉ. जायसवाल कहते हैं, “सभी कारणों से बचा नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली और नियमित जांच से खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।”

अपने शरीर को जानें: आत्म-परीक्षण करें

महिलाओं को महीने में एक बार ब्रेस्ट सेल्फ-एग्ज़ामिनेशन (आत्म-परीक्षण) ज़रूर करना चाहिए।
ध्यान दें —

किसी गांठ, मोटापन या सूजन पर

आकार, आकार में बदलाव या त्वचा की बनावट में अंतर पर

निप्पल से कोई स्राव (डिस्चार्ज) या निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना

डॉ. जायसवाल का कहना है,
“अधिकांश मामलों में स्तन में हुए बदलाव कैंसर नहीं होते, लेकिन अगर कोई गांठ या असामान्यता दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना चाहिए।”

याद रखें: सतर्कता, आत्म-परीक्षण और जागरूकता — यही हैं स्तन कैंसर से लड़ने की सबसे मजबूत ढाल
अस्पताल के बारे में
1992 में स्थापित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, CARE Hospitals Group का हिस्सा है और NABH मान्यता प्राप्त है। यहां 30 से अधिक विशेषताएं, अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, रोबोटिक सर्जरी, स्पेशलाइज्ड आईसीयू और उत्कृष्ट विभाग (कार्डियोलॉजी, न्यूरोसाइंस, ऑन्कोलॉजी, नेफ्रोलॉजी आदि) उपलब्ध हैं। आपातकालीन विभाग 24×7 संचालित होता है और इसमें प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है। कैंसर इलाज के क्षेत्र में अस्पताल ने इम्यूनोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत सेवाओं की भी शुरुआत की है।

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