Palamu News: चर्चित विनीत तिवारी अपहरण हत्याकांड का मुख्य आरोपी प्रशांत तिवारी झांसी से गिरफ्तार, पुलिस पूछताछ में हुए खुलासे
पलामूः जिला के बहुचर्चित विनीत तिवारी अपहरण और हत्याकांड मामले में पलामू पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने इस सनसनीखेज कांड के मुख्य आरोपियों में से एक प्रशांत तिवारी को उत्तर प्रदेश के झांसी से धर दबोचा है।
🚗 मेदिनीनगर से अपहरण के बाद सदर थाना क्षेत्र में मिला था शव, कई नामजद आरोपी हैं शामिल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पलामू के मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र से बीते 25 अप्रैल को विनीत तिवारी का अपहरण कर लिया गया था, जिसके बाद 26 अप्रैल को सदर थाना क्षेत्र के जोरकट इलाके से उनका शव बरामद किया गया था। इस अपहरण और दर्दनाक हत्याकांड में कुख्यात गैंगस्टर प्रदीप तिवारी उर्फ महाकाल, उसके भाई दिलीप तिवारी, प्रशांत तिवारी, राकेश तिवारी और रौशन तिवारी के नाम मुख्य रूप से जुड़े हुए हैं। इनमें दिलीप तिवारी और प्रदीप तिवारी उर्फ महाकाल नामजद आरोपी हैं, जबकि अनुसंधान के दौरान तीन अन्य आरोपियों के नाम भी मुकदमे में जोड़े गए। घटना के ठीक सात दिन बाद पुलिस ने दिलीप तिवारी उर्फ मिंटू तिवारी को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेज दिया था, और अब गिरफ्तार किए गए प्रशांत तिवारी ने पलामू पुलिस के सामने कई अहम और बड़े खुलासे किए हैं।
🪞 जमीन के कारोबार और वर्चस्व की लड़ाई में की गई थी विनीत तिवारी की हत्या
पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी प्रशांत तिवारी ने विनीत तिवारी हत्याकांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण राज खोले हैं। प्रशांत ने पुलिस को बताया कि गैंगस्टर प्रदीप तिवारी उर्फ महाकाल और उसका भाई दिलीप तिवारी जमीन का बड़ा कारोबार करते थे, और मृतक विनीत तिवारी भी इसी धंधे से जुड़ा हुआ था। जमीन के इसी कारोबार और वर्चस्व की जंग को लेकर विनीत तिवारी की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या की गई थी, और हत्या के बाद उसके शव को जमीन पर घसीटा भी गया था। प्रशांत द्वारा दी गई पूरी जानकारी के आधार पर पुलिस अब आगे की कानूनी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
🌳 जंगल में छिपने के बाद यूपी के झांसी में मात्र एक वक्त की रोटी खाकर काट रहा था दिन
पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस खौफनाक वारदात को शराब के नशे में अंजाम दिया गया था। प्रशांत ने पुलिस को बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद वह सुबह अपने घर पहुंचा था, जहां उसे अपनी इस करतूत पर पछतावा भी हुआ था। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए वह पहले अपने ही गांव के जंगल में दो दिनों तक छिपकर रहा, और उसके बाद अपने रिश्तेदारों व करीबियों की मदद से उत्तर प्रदेश के झांसी भाग गया। झांसी में वह मात्र 3000 रुपये महीने के किराए के मकान पर छिपकर रह रहा था। गिरफ्तारी के डर और पैसों की तंगी के चलते उसके पास बेहद कम नकदी बची थी, और पैसे बचाने के चक्कर में वह केवल एक वक्त का खाना खाकर किसी तरह अपना वक्त गुजार रहा था।
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