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बलौदाबाजार की सीमेंट कंपनियों पर बरसे शैलेश नितिन त्रिवेदी; बाहरी लोगों को नौकरी देने और स्थानीय छंटनी का आरोप

बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़): जिले में संचालित विभिन्न सीमेंट कंपनियों में स्थानीय युवाओं और श्रमिकों को रोजगार न मिलने तथा पुरानी कार्यबल की छंटनी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष और बलौदाबाजार विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी शैलेश नितिन त्रिवेदी ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा है कि जिले की सीमेंट कंपनियां प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों की खुलेआम अनदेखी कर बाहरी लोगों को नौकरियां दे रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो स्थानीय कर्मचारी कई वर्षों से ईमानदारी से काम कर रहे हैं, उन्हें भी कथित रूप से झूठे और निराधार आरोप लगाकर नौकरी से निकाला जा रहा है। त्रिवेदी ने इस संवेदनशील मामले को स्थानीय युवाओं के रोजगार, हक और सम्मान से जोड़ते हुए जिला प्रशासन से तत्काल कड़े हस्तक्षेप की मांग की है।

💼 स्थानीय बेरोजगारों को दरकिनार कर बाहरी लोगों को मिल रही प्राथमिकता, युवाओं में बढ़ा असंतोष

कलेक्टर को भेजे गए ज्ञापन पत्र में शैलेश नितिन त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि जिले में स्थापित भारी सीमेंट उद्योगों से सबसे अधिक प्रभावित गांवों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, लेकिन धरातल पर वास्तविक स्थिति इसके ठीक विपरीत नजर आ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां स्थानीय हुनरमंद युवाओं को रोजगार का अवसर देने के बजाय बाहरी राज्यों व जिलों के लोगों को नौकरियां दे रही हैं। इसके चलते क्षेत्र के शिक्षित और बेरोजगार युवाओं में दिन-प्रतिदिन निराशा और तीखा असंतोष पनप रहा है।

⚠️ आवाज उठाने वाले स्थानीय कर्मचारियों को हटाने का आरोप, श्रमिकों में असुरक्षा का माहौल

त्रिवेदी ने पत्र के माध्यम से उजागर किया कि कई स्थानीय मजदूर और कर्मचारी वर्षों से इन सीमेंट संयंत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब उन्हें प्रबंधन द्वारा मनमाने ढंग से निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मजदूर हितों और न्याय की बात करने वाले कर्मचारियों पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें सेवा से पृथक किया जा रहा है, जिससे संयंत्रों में कार्यरत अन्य श्रमिकों में भी भारी असुरक्षा और भय का माहौल निर्मित हो गया है।

⚡ ‘मजदूरों की आवाज दबाना कंपनियों की नीति’, उग्र आंदोलन और सामाजिक तनाव की चेतावनी

शैलेश नितिन त्रिवेदी ने सीमेंट उद्योग प्रबंधनों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि मजदूरों की जायज आवाज को दबाना ही कंपनियों की नीति बन गई है, तो क्षेत्र में पनप रहा यह जन-असंतोष कभी भी एक बड़े और उग्र आंदोलन का रूप धारण कर सकता है।

उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि यदि स्थानीय निवासियों और प्रभावितों की लगातार उपेक्षा जारी रही, तो क्षेत्र में गंभीर सामाजिक तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

📋 शैलेश नितिन त्रिवेदी ने जिला प्रशासन के समक्ष रखीं ये तीन मुख्य मांगें:

  • पुनर्बहाली: नौकरी से अवैध और गलत तरीके से निकाले गए सभी स्थानीय श्रमिकों को तत्काल प्रभाव से पुनः सेवा में लिया जाए।

  • रोजगार में प्राथमिकता: जिले के प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में निश्चित प्रतिशत की प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए।

  • निष्पक्ष जांच: श्रमिकों को सेवा से हटाने के सभी मामलों की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित सीमेंट कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो।

🚪 मांगें न पूरी होने पर सीमेंट संयंत्रों के मुख्य द्वार पर तालाबंदी और आंदोलन का ऐलान

शैलेश नितिन त्रिवेदी ने जिला प्रशासन और कंपनियों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि पीड़ित स्थानीय श्रमिकों और बेरोजगार युवाओं को समय रहते न्याय नहीं मिला, तो क्षेत्र की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर सीमेंट संयंत्रों के मुख्य द्वारों पर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से विशाल आंदोलन व प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी कोई भी असहज स्थिति पैदा होती है, तो इसकी पूरी नैतिक व कानूनी जिम्मेदारी संबंधित सीमेंट कंपनियों के अड़ियल प्रबंधन और प्रशासन की होगी।

Shailesh Nitin Trivedi letter to Balodabazar Collector

Shailesh Nitin Trivedi letter to Balodabazar Collector

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