दिल्ली की जेलों में अप्राकृतिक मौत पर मिलेगा 7.5 लाख तक का मुआवजा: दिल्ली सरकार ने अधिसूचित की नई योजना
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विभिन्न जेलों में अभिरक्षा (कस्टडी) के दौरान होने वाली अप्राकृतिक मौतों के मामलों में मृतक कैदियों के निकटतम परिजन अथवा उनके वैध उत्तराधिकारियों को वित्तीय मुआवजा प्रदान करने हेतु एक ऐतिहासिक योजना अधिसूचित की है।
इस जनकल्याणकारी योजना के अंतर्गत विभिन्न परिस्थितियों के आधार पर पीड़ित परिजनों को ₹5 लाख से लेकर ₹7.5 लाख तक की मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी।
🏛️ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों पर आधारित है ‘कैदी मुआवजा योजना 2025’
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अधिसूचित यह योजना पीड़ित परिवारों को निर्धारित और विषम परिस्थितियों में समयबद्ध राहत उपलब्ध कराने के साथ-साथ जेल प्रशासन की उत्तरदायित्व क्षमता को अधिक मजबूत करेगी।
दिल्ली सरकार के गृह (सामान्य) विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह योजना “दिल्ली जेलों में कैदियों की मृत्यु होने पर मुआवजा भुगतान योजना, 2025” के नाम से लागू की जाएगी। यह व्यवस्था केवल उन्हीं मामलों पर प्रभावी होगी, जिनमें योजना की अधिसूचना तिथि या उसके उपरांत दिल्ली की किसी भी जेल में कैदी की अप्राकृतिक मृत्यु हुई हो।
💰 आपसी मारपीट पर ₹7.5 लाख और लापरवाही पर ₹5 लाख मुआवजा तय, प्राकृतिक मौत पर नहीं मिलेगी राशि
अधिसूचना की शर्तों के अनुसार, कैदियों के आपस में झगड़े अथवा जेल कर्मियों द्वारा कथित यातना व मारपीट के कारण होने वाली मृत्यु पर परिजनों को ₹7.5 लाख की सहायता राशि दी जाएगी।
वहीं, जेल अधिकारियों या कर्मचारियों की ड्यूटी में लापरवाही, मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ की चूक अथवा कैदी द्वारा आत्महत्या किए जाने के प्रकरणों में ₹5 लाख का मुआवजा निर्धारित किया गया है।
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अपवाद: प्राकृतिक मृत्यु या किसी गंभीर बीमारी से हुई मौत के मामलों में मुआवजा देय नहीं होगा। इसके अलावा, जेल से फरार होने/हिरासत से भागने के दौरान हुई मृत्यु और प्राकृतिक आपदा-विपदा के चलते हुई मौतों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।
📜 महानिदेशक (कारागार) को भेजनी होगी मजिस्ट्रियल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
योजना के सफल संचालन हेतु संबंधित जेल अधीक्षक को प्रत्येक मामले में मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु के अंतिम कारण, कैदी का मेडिकल इतिहास तथा मृत्यु से पूर्व उपलब्ध कराए गए इलाज का पूरा विवरण महानिदेशक (कारागार) दिल्ली को प्रेषित करना अनिवार्य होगा।
🔍 डीजी जेल की अध्यक्षता में बनेगी उच्चस्तरीय समिति, जेल प्रशासन में बढ़ेगी पारदर्शिता
अधिसूचना के अनुसार, महानिदेशक (कारागार) की अध्यक्षता में गठित एक विशेष समिति इन मामलों की गहन समीक्षा करेगी।
इस समिति में सहायक महानिरीक्षक (कारागार), रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर, उप नियंत्रक (लेखा) तथा विधि अधिकारी बतौर सदस्य शामिल रहेंगे। समिति की अनुशंसा के आधार पर ही विभाग के प्रशासनिक सचिव के समक्ष मुआवजा स्वीकृति का अंतिम प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुआवजा राशि के भुगतान के उपरांत संबंधित जेल अधीक्षक इसकी आधिकारिक सूचना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को प्रेषित करेंगे।
⚖️ “मानवीय गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है सरकार”: मुख्यमंत्री का वक्तव्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार कानून के शासन, मानवीय गरिमा और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कस्टडी के दौरान किसी भी व्यक्ति की अप्राकृतिक मृत्यु होना अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। सरकार का मुख्य ध्येय जेल प्रशासन में संवेदनशीलता और जवाबदेही को बढ़ाना तथा प्रत्येक मामले में विधि के अनुसार न्याय सुनिश्चित करना है।
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