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Who is Aasiya Andrabi: ‘कश्मीर की लेडी कसाब’ को उम्रकैद, कोर्ट ने क्यों की अजमल कसाब से तुलना? जानें आसिया अंद्राबी का काला चिट्ठा

दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. आसिया को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के मामले में ये सजा सुनाई गई है. न्यायाधीश ने कहा, दोषी ने अपने कृत्यों के प्रति कोई पश्चाताप नहीं दिखाया है, बल्कि यह कहा गया है कि उन्हें अपने किए पर गर्व है और वे आगे भी वही काम करते रहेंगे.

उन्होंने इस मामले की तुलना 26/11 मुंबई हमलों के दोषी और गिरफ्तार किए गए अकेले आतंकवादी अजमल कसाब के मामले से की, जिसने अपने कृत्य के लिए कोई पश्चाताप व्यक्त नहीं किया था. अदालत ने यह तर्क भी दिया कि दोषी के प्रति किसी भी प्रकार की सहनशीलता दिखाने से समान विचारों वाले अन्य लोगों को यह संदेश जा सकता है कि वे कुछ वर्षों के कारावास के माध्यम से ऐसे कृत्यों से बच सकते हैं और इससे भारत के एक हिस्से में अलगाव संबंधी विचारों को बढ़ावा मिल सकता है.

कोर्ट की अहम टिप्पणी

न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी प्रकार की नरमी दिखाने से दोषियों की उस भावना में नई जान और जोश भर जाएगा जिसका उद्देश्य भारत के एक अभिन्न अंग को अलग करना है. अंद्राबी को UAPA की धारा 18 (षड्यंत्र के लिए सजा) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अंद्राबी ने कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची थी.

आदेश में कहा गया है कि अंद्राबी ने अपने भाषणों और साक्षात्कारों में स्पष्ट रूप से इस बात की वकालत की और पाकिस्तान से इस दुष्प्रचार के लिए समर्थन मांगा कि कश्मीर कभी भारत का हिस्सा नहीं था.

कौन है आसिया अंद्राबी?

आसिया अंद्राबी प्रतिबंधित कश्मीरी अलगाववादी महिला संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की संस्थापक नेता है. वह 1980 के दशक की शुरुआत से ही एक पाकिस्तान-समर्थक अलगाववादी आंदोलन चला रही है. इस आंदोलन का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर (J&K) को भारत से अलग करना है. पाकिस्तान स्थित कई भारत विरोधी जिहादी समूहों से जुड़े होने के कारण आसिया लगातार सुरक्षा निगरानी में रही है.

आसिया श्रीनगर के रहने वाले डॉक्टर सैयद शहाबुद्दीन अंद्राबी की सबसे छोटी बेटी है. वह श्रीनगर के गवर्नमेंट वीमेंस कॉलेज से विज्ञान में स्नातक है. आसिया को बहुत कम उम्र में ही उनके भाई इनायतुल्ला अंद्राबी ने इस्लामी साहित्य से परिचित कराया था. इनायतुल्ला अंद्राबी कश्मीर विश्वविद्यालय में भाषा विज्ञान के पूर्व शिक्षक थे और जमात-ए-इस्लामी (JeI) की छात्र शाखा, इस्लामी जमीयत तुलबा के सदस्य थे.

इससे उनका दुनिया को देखने का नजरिया बदल गया और उन्हें जमात-ए-इस्लामी, कश्मीर की महिला शाखा में शामिल होने की प्रेरणा मिली. 1980 के दशक के मध्य में आसिया ने JeI से खुद को अलग कर लिया और ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ का गठन किया, जिसके साथ ही उन्होंने कश्मीर में महिलाओं के लिए ड्रेस कोड लागू करने का अभियान शुरू किया. आसिया अंद्राबी की शादी आशिक हुसैन फकतू (उर्फ डॉ. कासिम) से हुई है.

1993 में आसिया को उनके दुधमुंहे बच्चे और पति के साथ एक साल से भी ज़्यादा समय के लिए जेल में डाल दिया गया था. इसके बाद से अंद्राबी पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत कई बार जेल आती-जाती रही हैं.

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