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CG Assembly: महिला सशक्तिकरण पर छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र; शासकीय संकल्प पेश, आरक्षण पर हुई बड़ी चर्चा

रायपुर: गुरुवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया. इस सत्र में महिला सशक्तिकरण को लेकर शासकीय संकल्प पेश किया गया. सत्र की शुरुआत ही हंगामे और तीखी बहस के बीच शुरू हुई. इस सत्र का मुख्य एजेंडा महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को लेकर शासकीय संकल्प प्रस्तुत करना है. पक्ष-विपक्ष की महिला विधायकों ने अपनी बात रखी.

मुख्यमंत्री ने पेश किया प्रस्ताव

सत्र की शुरुआत में सदन ने पूर्व विधानसभा सदस्य जगेश्वर राम भगत और पूर्व राज्यसभा सदस्य मोहसिना किदवई के निधन पर शोक व्यक्त किया. इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शासकीय संकल्प पेश करते हुए कहा कि संसद और सभी विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया जाए. इसके बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 4 घंटे का समय तय किया गया.

विपक्ष का हंगामा और आरोप

इस बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने अशासकीय संकल्प पेश करने की कोशिश की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया. इस पर विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया और आरोप लगाए कि सत्ता पक्ष महिलाओं को गुमराह कर रहा है. पहले निंदा प्रस्ताव की बात कही गई, अब संकल्प लाया जा रहा है.

सत्ता पक्ष का जवाब

बीजेपी की महिला विधायक लता उसेंडी ने चर्चा की शुरुआत में करते हुए कहा कि महिला आरक्षण में बाधा विपक्ष ने डाली है. लोकसभा में बिल गिराने के लिए विपक्ष जिम्मेदार रहा. इस बीच डिप्टी सीएम साव ने भी कांग्रेस पर तंज कसते हुए पुराने वादों को याद दिलाया.

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने कहा कि महिला आरक्षण बिल “चुनावी झुनझुना” है. 2023 में बिल पास होने के बाद भी लागू नहीं किया गया कांग्रेस 33% आरक्षण के पक्ष में है लेकिन इसे वर्तमान सीटों पर ही तुरंत लागू किया जाए. विधायक अनिला ने BJP पर महिलाओं के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

BJP की हिम्मत 543 सीटों पर 33% आरक्षण देने की नहीं है. महिलाएं इसका बदला BJP से जरूर लेंगी. BJP महिलाओं की कंधों पर बंदूक रखकर उनका अपमान कर रही हैं. चुनाव के बीच सत्र बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी. महिला सुरक्षा पर सरकार बात करती है, आज कौन सी महिला देश में सुरक्षित है यह बताएं?– अनिला भेड़िया, कांग्रेस विधायक

500 से ज्यादा महिला जनप्रतिनिधि शामिल

इस विशेष सत्र में प्रदेश भर से 500 से अधिक महिला जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही, जिससे सत्र का महत्व और बढ़ गया. सत्र के दौरान महिला सुरक्षा, आरक्षण और राजनीतिक नीयत जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच लगातार तीखी बहस चल रही है.

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