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Dewas Factory Blast: देवास पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, 5 मजदूरों की मौत, 20 से ज्यादा घायल

मध्यप्रदेश के देवास के टोंककलां गांव में गुरुवार सुबह एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका हो गया। इस हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री की दीवारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और शवों के अवशेष 25 फीट दूर तक जा गिरे। कई घंटों तक पटाखों के फूटने की आवाजों से इलाका गूंजता रहा, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।

🏥 मृतकों में बिहार-यूपी के मजदूर शामिल: अस्पताल में घायलों का संघर्ष जारी

इस हादसे में तीन मजदूरों—धीरज, सन्नी और सुमित—की मौत मौके पर ही हो गई थी। अमलतास अस्पताल में भर्ती दो अन्य मजदूरों, अमर और गुड्डू ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया; ये दोनों करीब 99% तक झुलस चुके थे। मृतकों में चार मजदूर बिहार और एक उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया जा रहा है। प्रशासन अब घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में जुटा है।

👮 फैक्ट्री संचालक और मैनेजर गिरफ्तार: प्रशासन ने सील किया परिसर

धमाके के समय फैक्ट्री के भीतर 20 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया है और बिहार निवासी मैनेजर एजाज खान को भी हिरासत में लिया गया है। टोंकखुर्द थाना पुलिस ने इस मामले में कुल चार आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है।

📦 अवैध भंडारण का खुलासा: अनुमति से कई गुना ज्यादा बारूद बरामद

शुरुआती जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। फैक्ट्री में अनुमति से कई गुना ज्यादा बारूद और पटाखों का स्टॉक किया गया था। लाइसेंस के अनुसार केवल 15-15 किलो बारूद रखने की अनुमति थी, लेकिन मौके से टनों में विस्फोटक सामग्री मिली है। इसके अलावा, फैक्ट्री में बिहार से लाए गए नाबालिग मजदूरों से भी काम कराए जाने की बात सामने आई है, जिन्हें महज 400 रुपये की दिहाड़ी दी जाती थी।

⚠️ प्रशासन की लापरवाही पर सवाल: बिना रिन्यूअल के चल रही थी मौत की फैक्ट्री

फैक्ट्री का लाइसेंस 31 मार्च को समाप्त हो गया था और उसका रिन्यूअल 6 मई को कराया गया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या फैक्ट्री एक महीने तक अवैध रूप से संचालित होती रही? स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी साल मार्च में भी यहां ब्लास्ट हुआ था, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इस बार की लापरवाही ने पांच परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं, जिसकी अब उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।

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