Indian Army’s Zorawar Tank: स्वदेशी लाइट टैंक को मिली नई ताकत, थर्मल कैमुफ्लाज से दुश्मन के रडार को देगा चकमा
भारत का स्वदेशी ‘जोरावर’ लाइट टैंक अब और अधिक घातक होने जा रहा है। DRDO और Larsen & Toubro (L&T) द्वारा विकसित 25 टन वजनी इस टैंक में अब अत्याधुनिक ‘Adaptive Thermal Camouflage System’ जोड़ा जा रहा है। यह तकनीक टैंक को दुश्मन के ड्रोन, थर्मल कैमरा और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर से छिपाने में मदद करेगी, जिससे पूर्वी लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में यह दुश्मन के लिए काल साबित होगा।
🌡️ कैसे काम करती है थर्मल कैमुफ्लाज तकनीक?
इस तकनीक के तहत टैंक पर ‘Flexible Adaptive Thermal Camouflage Pads’ लगाए जाएंगे। ये पैनल अपने आसपास के वातावरण के हिसाब से खुद को गर्म या ठंडा कर लेंगे, जिससे टैंक का तापमान वातावरण के बराबर हो जाएगा।
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सेंसर और माइक्रोकंट्रोलर: हर पैनल में FPGA आधारित माइक्रोकंट्रोलर और सेंसर लगे होंगे, जो रियल टाइम में तापमान मापेंगे।
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हीटिंग और कूलिंग: गर्मी के लिए ‘conductive ink’ और ठंडक के लिए ‘flexible Peltier technology’ का उपयोग होगा।
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पावर बैकअप: हर पैनल में अपनी रिचार्जेबल लिथियम-आयन बैटरी होगी, जो मुख्य सिस्टम फेल होने पर भी 3 घंटे तक काम करेगी।
🏔️ लद्दाख में जोरावर टैंक की सामरिक अहमियत
105mm की मुख्य तोप से लैस जोरावर टैंक को विशेष रूप से पहाड़ी और बर्फीले इलाकों के लिए बनाया गया है। चीन के Type-15 लाइट टैंकों का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना को ऐसे ही फुर्तीले और अदृश्य रहने वाले टैंकों की जरूरत थी। यह तकनीक टैंक को चट्टानों और बर्फ के तापमान के अनुकूल ढालकर लंबे समय तक दुश्मन की नजरों से छिपाए रखेगी।
🚀 भविष्य की राह: कब तक शामिल होगा सेना में?
जोरावर प्रोजेक्ट पर 2022 से काम जारी है और जुलाई 2024 में इसका पहला प्रोटोटाइप सामने आया था। अभी इसके मोबिलिटी और फायरपावर के ट्रायल चल रहे हैं। यदि सभी यूजर ट्रायल सफल रहते हैं, तो:
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2026-27: लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन की शुरुआत।
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2027-28: भारतीय सेना में बड़े पैमाने पर इंडक्शन। भारतीय सेना को लगभग 350 से ज्यादा लाइट टैंकों की आवश्यकता है। विश्व के चुनिंदा देशों के पास ही यह सक्रिय थर्मल कैमुफ्लाज तकनीक है, ऐसे में जोरावर में इसका इस्तेमाल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की एक बड़ी उपलब्धि है।
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