Palamu News: पलामू में मानवता शर्मसार; 14 साल की विधवा मां बच्चे को अनाथालय सौंपने पहुंची, DC ने बढ़ाया मदद का हाथ
झारखंड के पलामू जिले में मानवता को झकझोर देने वाली एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। पलामू डीसी के जन समाधान दिवस में बुधवार को एक ऐसी नाबालिग लड़की पहुंची, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों की आंखें नम कर दीं। इस लड़की ने डीसी से गुहार लगाते हुए कहा कि वह अपने कलेजे के टुकड़े (बच्चे) को अनाथालय को सौंपना चाहती है। इसके पीछे का मुख्य कारण यह था कि अत्यंत गरीबी के चलते लड़की अपने बच्चे का बुनियादी भरण-पोषण करने में पूरी तरह असमर्थ थी, जिसके कारण उसे विवश होकर यह कठोर कदम उठाना पड़ा।
💔 कम उम्र में बाल विवाह और फिर पति की मौत: बेसहारा हुई नाबालिग
दरअसल, मां बनी इस अभागी लड़की की उम्र महज 14 वर्ष है। सामाजिक कुरीतियों के चलते परिजनों ने कम उम्र में ही उसकी शादी कर दी थी, जिसके कारण वह 14 वर्ष की उम्र में मां भी बन गई। नियति का क्रूर मजाक यहीं नहीं रुका; मां बनने के कुछ समय बाद ही उसके पति का असमय देहांत हो गया। पति की मौत के बाद ससुराल और मायके से उसे कोई सहारा नहीं मिला, जिसके कारण वह दाने-दाने को मोहताज हो गई। इसी बेबसी में वह डीसी के जन समाधान दिवस में पहुंचकर बच्चे को सुरक्षित भविष्य देने के लिए अनाथालय को सौंपने की मार्मिक गुहार लगा रही थी।
🤝 डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने तुरंत बढ़ाया मदद का हाथ, हर महीने मिलेंगे 4 हजार रुपये
लड़की की इस दर्दभरी दास्तान को सुनने के बाद पलामू के डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसे हर संभव प्रशासनिक मदद का भरोसा दिया। इस मौके पर डीसी ने बाल संरक्षण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चे को तुरंत सरकारी ‘स्पॉन्सरशिप प्रोग्राम’ (Sponsorship Program) से जोड़ा जाए, ताकि बच्चे के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए प्रत्येक महीने ₹4,000 की वित्तीय सहायता मिल सके। इसके साथ ही, डीसी ने लड़की को अन्य कल्याणकारी सरकारी योजनाओं से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार (Self-Employment) के अवसर उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।
📊 पलामू में बाल विवाह का कड़वा सच: 35 प्रतिशत शादियां अब भी दायरे में
डीसी ने भावुक लड़की को ढांढस बंधाते हुए समझाया कि जिला प्रशासन पूरी तरह उसके साथ है और उसे घबराने की जरूरत नहीं है। जानकारी के अनुसार, यह लड़की पलामू नगर निगम क्षेत्र की ही रहने वाली है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के हालिया चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, पलामू जिले में आज भी लगभग 35 प्रतिशत शादियां बाल विवाह की श्रेणी के अंतर्गत आती हैं, जो समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। बुधवार को आयोजित इस जन समाधान दिवस में कई अन्य शिकायतें भी पहुंची थीं, जिनका डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने मौके पर ही निस्तारण किया।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.