Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Congress Attack on BJP: बिलासपुर अस्पताल के पूर्ण संचालन की मांग; कांग्रेस ने कहा- उद्घाटन काफी नहीं... बेमेतरा: लगातार बारिश के कारण ढही मकान की कच्ची दीवार, मलबे में दबने से 2 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौ... Paper Leak Protest MCB: NSUI का 'छात्रों की गूंज' अभियान; पेपर लीक पर केंद्र सरकार को घेरा, इस्तीफे ... Chhattisgarh UCC Update: मन की बात के मंच से सीएम विष्णुदेव साय का बड़ा सियासी संकेत, छत्तीसगढ़ में UC... जांजगीर-चांपा: मॉर्निंग वॉक पर निकले 3 बुजुर्गों को अज्ञात वाहन ने रौंदा, मौके पर हुई दर्दनाक मौत Dinanagar Shocking Case: घर में अकेला पाकर मासूम को बनाया शिकार; पुलिस ने आरोपी बुजुर्ग के खिलाफ की ... Faridkot Crime & Safety: खराब ट्रक ने ली 3 युवाओं की जान; बिना इंडिकेटर और रिफ्लेक्टर के खड़ा था वाहन Phagwara Crime: फगवाड़ा माल गोदाम रोड पर बदमाशों का तांडव; सीसीटीवी में कैद हुई वारदात, पुलिस जांच म... Dinanagar Road Accident: अमृतसर-पठानकोट हाईवे पर आमने-सामने टकराईं दो बसें; यात्रियों में मची अफरा-त... गुरदासपुर: डेरा बाबा नानक पुलिस का बड़ा प्रहार, अवैध हथियार और हेरोइन के साथ तीन आरोपी गिरफ्तार

Kamakhya Temple Reopens: अंबुबाची मेले के समापन के बाद खुले कामाख्या मंदिर के कपाट; उमड़ी भक्तों की भीड़

गुवाहाटी: असम के नीलांचल पर्वत पर स्थित माता कामाख्या का पावन धाम आज भक्तों के लिए दोबारा खुल गया है। 22 जून से माता के रजस्वला (अंबुबाची) काल के चलते मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे, जो 26 जून को निवृत्ति अनुष्ठान के बाद खोल दिए गए। मंदिर के बाहर मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, जो माता का आशीर्वाद लेने के लिए आतुर हैं।

🙏 मेले के समापन और मंदिर खुलने की प्रक्रिया

अंबुबाची मेले के समापन के बाद मंदिर में विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  • विशेष स्नान और पूजा: सबसे पहले मां कामाख्या को शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद दैनिक यज्ञ, हवन और विशेष पूजा-अर्चना शुरू होती है।

  • भोग अर्पण: देवी को ताजे फल, मिठाइयां और पारंपरिक भोग अर्पित किए जाते हैं।

  • अंगोदक और अंगवस्त्र: भक्तों को ‘अंगोदक’ और पवित्र ‘अंगवस्त्र’ (जो गर्भगृह में शिला पर बिछाया जाता है) प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

🏛️ शक्ति उपासना का केंद्र: कामाख्या मंदिर

माता कामाख्या का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां कोई मूर्ति नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक शिला (योनिकुंड) की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहीं माता सती का योनि भाग गिरा था। इसी शिला से निरंतर जल प्रवाहित होता रहता है, जो इस स्थान को अन्य शक्तिपीठों से अलग और विशिष्ट बनाता है।

🌟 क्यों है भक्तों में उत्साह?

मान्यता है कि अंबुबाची के बाद मंदिर के कपाट खुलने पर जो भक्त सर्वप्रथम माता के दर्शन करते हैं, उन्हें देवी की विशेष कृपा और मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि मेले के समापन के समय यहां असम और पूरे भारत से लाखों की संख्या में साधु-संत, तांत्रिक और श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.