अरनिया में मिले 2 पाकिस्तानी कबूतर, पंजों में बंधी रिंग पर लिखे मिले पाक मोबाइल नंबर; सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
जम्मू-कश्मीर: अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) से सटे अरनिया सेक्टर के मोलू चक इलाके में पाकिस्तानी मोबाइल नंबर अंकित रिंग पहने दो संदिग्ध कबूतर मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं।
प्राप्त विवरण के अनुसार, मोलू चक के एक स्थानीय ग्रामीण ने अपने घर की छत पर दो अज्ञात कबूतरों को देखा। पक्षियों की असामान्य गतिविधियों और उनके पैरों में लगी धातु की रिंग को देखते हुए सतर्क नागरिक ने अविलंब इसकी सूचना सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस को दी।
📱 Jazz/Moblink नेटवर्क के नंबर दर्ज: जासूसी और सीक्रेट कोडिंग का अंदेशा
बरामदगी और तकनीकी विवरण:
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पाकिस्तानी संपर्क नंबर: सुरक्षाबलों द्वारा कबूतरों को सुरक्षित कब्जे में लेकर जब गहन जांच की गई, तो एक कबूतर के पंजे में विशेष छल्ला (रिंग) मिला।
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रिंग पर लिखे नंबर: इस छल्ले पर दो पाकिस्तानी मोबाइल नंबर 0327-5613257 और 0325-4226312 स्पष्ट रूप से दर्ज थे।
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नेटवर्क प्रदाता: प्राथमिक जांच में ये दोनों नंबर पाकिस्तान की टेलीकॉम कंपनी Jazz/Moblink नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं।
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जांच का दायरा: खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कबूतरों को सीमा पार से किस खास इलाके से उड़ाया गया था और इनके पंजों में नंबर बांधने का मुख्य मकसद क्या था।
🕵️ क्या सीमा पार मैसेजिंग या जासूसी का नया पैंतरा? सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की पड़ताल
सुरक्षा एजेंसियों का रुख और जांच के बिंदु:
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क्रॉस-बॉर्डर मैसेजिंग: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस बात की बारीकी से वेरिफिकेशन की जा रही है कि क्या इन पक्षियों का इस्तेमाल सीमा पार कोड वर्ड संदेश भेजने के लिए किया जा रहा था।
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नार्को-टेरर और टेस्टिंग: एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि कहीं इन पक्षियों का प्रयोग सीमा सुरक्षा बल (BSF) के रिस्पॉन्स टाइम को परखने या नशीले पदार्थों की तस्करी (ड्रग ट्रैफिकिंग) के किसी नेटवर्क से तो नहीं जुड़ा है।
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अधिकारियों का बयान: एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि पक्षियों को एहतियातन हिरासत में लेकर सभी संबंधित खुफिया इकाइयों को सूचित कर दिया गया है और मामले की हर तकनीकी व सुरक्षा कोण से जांच की जा रही है।
🌾 सरकंडा, नाले और घुसपैठ का रूट: बेहद संवेदनशील है अंतरराष्ट्रीय सीमा का यह क्षेत्र
रणनीतिक संवेदनशीलता और भौगोलिक चुनौतियां:
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घुसपैठ का पुराना गलियारा: अरनिया, कठुआ, हीरानगर और सांबा सेक्टर का इस्तेमाल पूर्व में भी पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा घुसपैठ के रास्ते के तौर पर किया जाता रहा है।
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भौगोलिक आड़: हीरानगर और सांबा से सटी 50 किलोमीटर की सीमा पर घनी सरकंडा (हाथी घास), प्राकृतिक नाले और बरसाती नदियां बहती हैं, जो घुसपैठियों को छिपने का अवसर देती हैं।
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राष्ट्रीय राजमार्ग की समीपता: जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे के नजदीक होने के कारण यह इलाका सुरक्षा की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। पूर्व में कठुआ, बसंतगढ़ और बिलावर में हुई आतंकी घटनाओं में शामिल आतंकियों ने इसी मार्ग से घुसपैठ की थी।
📜 पहले भी सामने आ चुके हैं ‘जासूस कबूतरों’ के मामले: कोडेड मैसेज और एंटीना मिले थे
अतीत की घटनाएं:
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हीरानगर (2020): वर्ष 2020 में हीरानगर के मनयारी गांव में भी पाकिस्तानी नंबर की रिंग पहने एक कबूतर को पकड़ा गया था।
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आरएस पुरा व अखनूर (2016 और 2018): इससे पहले वर्ष 2016 और 2018 में भी आरएस पुरा और अखनूर सेक्टर में संदिग्ध पक्षी पकड़े जा चुके हैं, जिन पर पाकिस्तानी मुहरें, गुप्त कोड और तार जैसे बारीक एंटीना बंधे पाए गए थे।
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सतर्कता बढ़ाई गई: ताजा घटना के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में बीएसएफ और पुलिस ने अपनी निगरानी व सतर्कता को और कड़ा कर दिया है।
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