Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Punjab Haryana 60:40 Quota Issue: चंडीगढ़ में पंजाब का हक कमजोर करने का आरोप, आप मीडिया इंचार्ज ने भ... Electricity Bill Protest in Zirakpur: मीटर रीडरों की हड़ताल का असर, गलत बिल ठीक करवाने के लिए घंटों ... Gold and Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, जानिए जालंधर में क्या है आज का नया... Travel Agent Fraud in Punjab: पैसों के साथ दस्तावेज लेकर विदेश नहीं भेजा, बैंक से फर्जी लोन भी निकलव... Punjab Police Guidelines for Petrol Pumps: बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल देने पर रोक, अमृतस... Ludhiana Municipal Corporation Protest: सफाई कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, विधायक अशोक पराशर के घर का ... Tapa Mandi Accident News: घड़ेली चौक के पास टूटी ट्राले की हुक, खेत में बिखरे नमक के गट्टे और फसल का... Baljit Nagar Murder Mystery: 10 साल की बेटी के बयान से खुला राज, पत्नी का गला घोंटने वाले पति को पुल... Yamuna Cleaning Mission 2029: जब तक यमुना साफ नहीं होगी, गंगा को स्वच्छ करना अधूरा है- गृह मंत्री अम... Delhi Police Denies Karni Sena Permission: जंतर-मंतर प्रदर्शन अनुमति मामला पहुंचा हाईकोर्ट, राज शेखा...

Buy House vs Rent and Invest: ₹1 करोड़ का घर खरीदें या ₹40 हजार के किराए पर रहकर करें निवेश? जानिए कौन सा विकल्प है बेहतर

घर खरीदना ज्यादातर लोगों के लिए जिंदगी का एक बहुत बड़ा फैसला होता है. लेकिन जब पैसों की बात आती है, तो अक्सर यह सवाल सामने आता है कि ₹1 करोड़ का घर खरीदना बेहतर है या ₹40,000 महीने के किराए पर रहकर बाकी पैसों का निवेश करना? ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ (Financial Express) की एक गणना में 20 साल की लंबी अवधि के लिए इन दोनों विकल्पों की तुलना की गई है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है.

💰 2. ₹1 करोड़ का घर खरीदने पर कितना आएगा खर्च? जानिए डाउन पेमेंट और 20 साल की कुल EMI का हिसाब

मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास हर महीने घर के लिए करीब ₹70,000 का बजट है और वह ₹1 करोड़ का घर खरीदता है. इसके लिए वह 20% यानी ₹20 लाख डाउन पेमेंट देता है और बाकी ₹80 लाख का होम लोन 8% ब्याज दर पर 20 साल के लिए लेता है. इस हिसाब से उसकी मासिक EMI करीब ₹66,900 होगी और 20 साल में कुल भुगतान ₹1.61 करोड़ (जिसमें ₹80.6 लाख ब्याज शामिल है) तक पहुंच जाएगा. डाउन पेमेंट मिलाकर शुरुआती खर्च करीब ₹1.81 करोड़ बैठता है, जिसमें स्टांप ड्यूटी और मेंटेनेंस जैसे अन्य खर्च शामिल नहीं हैं.

📈 3. किराए पर रहकर ₹30,000 की SIP करने पर कितना बनेगा फंड? जानिए 20 साल बाद का पूरा समीकरण

दूसरा व्यक्ति यदि यही घर ₹40,000 महीने के किराए पर लेता है, तो ₹70,000 के बजट में से किराया चुकाने के बाद हर महीने ₹30,000 निवेश के लिए बचते हैं. यदि वह इस रकम की 20 साल तक SIP करे और 12% सालाना रिटर्न मिले, तो यह फंड करीब ₹2.97 करोड़ हो सकता है. इसके अलावा, घर खरीदने वाले का जो ₹20 लाख डाउन पेमेंट बचा है, उसे भी 12% रिटर्न पर निवेश करने पर 20 साल में करीब ₹1.93 करोड़ बन सकते हैं. इस तरह दोनों निवेश मिलकर किराएदार का कुल कॉर्पस करीब ₹4.90 करोड़ तक पहुंच सकता है.

⚖️ 4. सिर्फ कागजी गणित नहीं, बल्कि किराए में बढ़ोतरी और अन्य खर्चों को भी समझें

कागज पर किराएदार का कॉर्पस भले ही ₹4.90 करोड़ और घर खरीदार की प्रॉपर्टी की कीमत ₹4.66 करोड़ (8% सालाना वृद्धि पर) दिखाई दे, लेकिन असली कहानी अलग है. इस गणना में किराया स्थिर माना गया है, जबकि असलियत में 5% सालाना बढ़ोतरी होने पर 20 साल में किराया ₹1.06 लाख तक पहुंच सकता है, जिससे निवेश राशि कम हो जाएगी. इसके अलावा घर खरीदने पर स्टांप ड्यूटी, टैक्स और मेंटेनेंस जैसे खर्च भी होते हैं, इसलिए यह फैसला सिर्फ 20 साल की रकम देखकर नहीं, बल्कि अपनी वित्तीय स्थिति और जरूरतों को देखकर ही करना चाहिए.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.