PM Modi Memento Auction: पीएम मोदी को मिले उपहारों की नीलामी पर सुहेल सेठ का लेख, कहा- यह सेवा और त्याग की मिसाल
सोशल मीडिया पर हाल ही में यह दावा तेजी से प्रसारित किया गया कि तोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने जो भाला (जैवलिन) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया था, उसे डेढ़ करोड़ रुपये में नीलाम कर दिया गया। इस दावे के साथ यह आरोप भी मढ़ा गया कि प्रधानमंत्री ने उपहार को नीलाम कर खिलाड़ी का अपमान किया है। इन दावों पर जाने-माने भारतीय व्यवसायी, स्तंभकार, लेखक और अभिनेता सुहेल सेठ ने एक विस्तृत लेख लिखकर स्थिति स्पष्ट की है।
सुहेल सेठ ने उल्लेख किया कि वर्ष 2014 से पूर्व राजनीतिक सत्ता में उपहारों को निजी संग्रह या शोकेस में सजाकर रखने की परंपरा थी। ताकतवर पदों पर बैठे लोग उपहार में मिली महंगी घड़ियों, शॉल, मूर्तियों और कारों को निजी उपयोग में लाते थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुरानी परिपाटी को पूरी तरह बदल दिया।
💰 उपहारों की नीलामी से समाज कल्याण: बेटियों की शिक्षा और नमामि गंगे में जाता है धन
नीलामी की प्रक्रिया और उद्देश्य:
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25 वर्षों की परंपरा: सुहेल सेठ के अनुसार, नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के समय से ही मिले उपहारों को सरकारी गोदामों में बंद रखने या घर की शेल्फ पर सजाने के बजाय नीलाम करते आ रहे हैं।
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बालिका शिक्षा में योगदान: मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उपहारों की नीलामी से प्राप्त समस्त धनराशि को बालिकाओं की शिक्षा जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में लगाया जाता था।
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नमामि गंगे परियोजना: 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इस नीलामी का सीधा संबंध ‘नमामि गंगे’ परियोजना से जोड़ा गया, ताकि पवित्र गंगा नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए धन जुटाया जा सके।
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पारदर्शी प्रक्रिया: शॉल, तलवारें, मूर्तियां, खिलाड़ियों के ऑटोग्राफ वाले बैट और नीरज चोपड़ा का जैवलिन जैसे सभी स्मृति चिह्न ‘नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट’ (NGMA) के माध्यम से पारदर्शी ई-नीलामी में रखे जाते हैं, जहां शुरुआती बोली मात्र ₹200 से शुरू होती है और आम नागरिक भी इनमें भाग ले सकते हैं।
🎯 खेल सामग्री की नीलामी वैश्विक चलन: सुहेल सेठ ने बताया सेवा और त्याग की मिसाल
विवाद का विश्लेषण:
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वैश्विक परंपरा: सुहेल सेठ ने रेखांकित किया कि दुनिया भर में खेल से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों और खेल सामग्री की नीलामी होना एक सामान्य और प्रतिष्ठित परंपरा है। इससे न केवल युवाओं में खेलों के प्रति आकर्षण बढ़ता है, बल्कि उस राशि का उपयोग सकारात्मक कार्यों के लिए होता है।
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त्याग और समर्पण: उन्होंने कहा कि बिना किसी दिखावे या राजनीतिक लाभ के पिछले 25 वर्षों से लगातार उपहारों को जनहित में समर्पित करना कोई नौटंकी नहीं, बल्कि सेवा और त्याग के मामले में एक अनुकरणीय उदाहरण है।
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