SIR Process Controversy India: चुनाव आयोग पर उठे सवालों के बाद सड़कों पर उतरी कांग्रेस, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं. एक रिपोर्ट में सामने आया था कि जूनियर चुनाव आयुक्तों ने कई बार आपत्तियां जताई थीं, जिसके बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आक्रामक हो गए हैं. दिल्ली, पटना, देहरादून, लखनऊ और कोलकाता समेत देश के कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर चुके हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. दिल्ली में चुनाव आयोग की बिल्डिंग और जंतर-मंतर के पास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया है.
⚖️ 2. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, फॉर्म 6 को रीस्टोर करने और 13 करोड़ वोट डिलीट होने की एसआईटी जांच की मांग
इस पूरे विवाद के बीच ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर की गई है. याचिका में मांग की गई है कि फॉर्म 6 को फिर से बहाल किया जाए और करीब 13 करोड़ वोट डिलीट किए जाने के मामले की स्वतंत्र एसआईटी (SIT) से जांच कराई जाए. इसके अलावा, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने सीईसी को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि शनिवार तक इस्तीफा नहीं दिया गया, तो 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से देशव्यापी बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
🗣️ 3. राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं: नवीन पटनायक और विपक्षी नेताओं ने की इस्तीफे की मांग, भाजपा का पलटवार
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि सीईसी और अन्य आयुक्तों के बीच गंभीर मतभेदों को देखते हुए ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद छोड़ देना चाहिए और पूरी एसआईआर प्रक्रिया की नए सिरे से समीक्षा होनी चाहिए. वहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ले लिया गया, जबकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी विपक्षी विधायकों ने ‘वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ के नारे लगाते हुए हंगामा किया. दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पलटवार करते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद कांग्रेस अपनी नीतियों पर आत्ममंथन करने के बजाय लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर आधारहीन सवाल उठा रही है.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.