Shahi Masjid Ujjain Update: इंदौर हाईकोर्ट में बनी सहमति, 9 फीट की जगह अब 3 फीट हिस्सा तोड़ेगा प्रबंधन
मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर उज्जैन की प्रसिद्ध शाही मस्जिद पर नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने का अभियान पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ (डबल बेंच) ने इस मामले में मस्जिद के विवादित हिस्से को तोड़े जाने के प्रशासनिक आदेश पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। अदालत के इस स्पष्ट रुख और आदेश के बाद अब नगर निगम और जिला प्रशासन के निर्देश पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। हालांकि, मौजूदा तनाव और स्थिति को संभालते हुए दोनों पक्षों के बीच बनी आपसी सहमति के आधार पर अब स्वयं मस्जिद प्रबंधन द्वारा ही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
📜 शाही मस्जिद को गिराए जाने को लेकर प्रशासन ने जारी किया था कड़ा नोटिस, मौके पर मची अफरातफरी
उज्जैन स्थित शाही मस्जिद के अतिक्रमण वाले हिस्से को तोड़ने को लेकर जिला प्रशासन द्वारा पिछले दिनों एक सख्त नोटिस जारी किया गया था। आज सोमवार को जब निर्धारित समय के अनुसार शाही मस्जिद को गिराने के लिए नगर निगम का भारी अमला और पुलिस बल मौके पर पहुंचा, तो वहां स्थानीय स्तर पर भारी तनाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इस पूरे संवेदनशील मामले को लेकर शाही मस्जिद कमेटी की तरफ से तुरंत इंदौर हाईकोर्ट में एक रिट याचिका भी दायर की गई थी, जिस पर आज ही आपातकालीन सुनवाई सुनिश्चित की गई थी।
🤝 हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच बनी आपसी सहमति
अदालत के समक्ष चली सुनवाई के दौरान उज्जैन जिला प्रशासन के नुमाइंदों और शाही मस्जिद के प्रबंधकों के बीच आपसी बातचीत के जरिए एक सकारात्मक समझौता कर लिया गया। पूर्व निर्धारित योजना के तहत जिला प्रशासन और उज्जैन नगर निगम द्वारा पूरी शाही मस्जिद का लगभग 9 फीट हिस्सा तोड़ा जाना तय किया गया था, लेकिन इंदौर हाईकोर्ट के समक्ष दोनों पक्षों की चली लंबी चर्चा के बाद इसे घटाकर केवल 3 फीट हिस्सा तोड़े जाने पर आपसी सहमति बन गई। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि मस्जिद परिसर के भीतर बनी हुई दुकानों को भी किसी बाहरी तोड़फोड़ के बजाय मस्जिद प्रबंधन द्वारा स्वयं ही हटाया जाएगा।
💰 दुकानों के पुनर्निर्माण का आश्वासन और अतिक्रमण हटाने के खर्च का दिया जाएगा पूरा मुआवजा
समझौते की शर्तों के मुताबिक, जिला प्रशासन और नगर निगम ने शाही मस्जिद प्रबंधक को यह ठोस आश्वासन दिया है कि तोड़ी जाने वाली दुकानों को भविष्य में किसी अन्य उपयुक्त सुरक्षित जगह पर दोबारा बनाकर दिया जाएगा। इसके अलावा, स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की इस पूरी प्रक्रिया में जो भी खर्च आएगा, उसका विधिवत मुआवजा भी प्रशासन द्वारा प्रबंधकों को प्रदान किया जाएगा। इन्हीं तमाम शर्तों और आपसी रजामंदी के आधार पर शाही मस्जिद प्रबंधक और उज्जैन जिला प्रशासन के बीच यह कानूनी समझौता संपन्न हुआ। जब दोनों पक्षों के वकीलों ने इस आपसी समझौते की जानकारी माननीय हाईकोर्ट को दी, तो अदालत ने दोनों पक्षों की लिखित सहमति को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का पूर्ण निराकरण कर दिया।
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