Share Market Crash: सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा, निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे; जानें बाजार में भारी गिरावट के 6 बड़े कारण
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली और चौतरफा गिरावट देखने को मिली। ईरान और अमेरिका के मध्य बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल के चलते निवेशकों में भारी घबराहट फैल गई। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1.6 प्रतिशत तक की भीषण गिरावट दर्ज की गई।
इस तीव्र गिरावट के कारण बीएसई सेंसेक्स 30 मार्च के बाद पहली बार फिसलकर 72 हजार अंकों के मनोवैज्ञानिक स्तर पर आ गया। यह बीते करीब 6 महीनों में घरेलू शेयर बाजार की सबसे बड़ी एकल-दिवसीय गिरावट साबित हुई है।
कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 1,124 अंक लुढ़ककर 72,800 के स्तर से नीचे बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 360 अंकों से अधिक की गिरावट आई और यह 22,800 के करीब पहुंचकर सिमटा। इस व्यापक बिकवाली के कारण बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) में से लगभग ₹8 लाख करोड़ स्वाहा हो गए, जिससे कुल एम-कैप घटकर करीब ₹474 लाख करोड़ रह गया।
📊 सेंसेक्स के 30 में से 29 शेयर लाल निशान में: केवल इंफोसिस बढ़त के साथ संभला
इंडेक्स और प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन:
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सर्वाधिक गिरावट वाले दिग्गज: सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से 29 के शेयर भारी नुकसान के साथ बंद हुए। बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे ज्यादा मार एलएंडटी (L&T) और पावर ग्रिड (Power Grid) के शेयरों पर पड़ी, जो लगभग 3% तक लुढ़क गए।
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दिग्गज स्टॉक्स पर दबाव: अडानी पोर्ट्स, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
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एकमात्र हरे निशान वाला शेयर: इस नकारात्मक रुझान के विपरीत केवल इंफोसिस (Infosys) एकमात्र ऐसा शेयर रहा, जिसने मजबूती दिखाते हुए हरे निशान में क्लोजिंग दी।
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मिडकैप व स्मॉलकैप में बिकवाली: व्यापक बाजार में भी जोरदार गिरावट रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग 2% नीचे आए। वहीं बाजार के उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला वोलैटिलिटी इंडेक्स ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) 12% उछलकर 14 के स्तर के समीप पहुंच गया।
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सेक्टोरल इंडेक्स का हाल: निफ्टी पीएसयू बैंक में 3% से ज्यादा और निफ्टी रियल्टी में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, एफएमसीजी और मेटल सेक्टर 1 से 2% टूटे। एनएसई पर 869 शेयरों में बढ़त के मुकाबले 2,716 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
🚨 शेयर बाजार में गिरावट के 6 प्रमुख कारण: क्यों घबराए निवेशक?
ग्लोबल और डोमेस्टिक स्तर पर बने दबाव के मुख्य बिंदु:
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1. ईरान-अमेरिका के बीच गंभीर तनाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के 7 दिवसीय सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के प्रस्ताव को खारिज करने से तनाव चरम पर पहुंच गया। ट्रंप ने शांति समझौते को ठुकराते हुए सख्त रुख अपनाया, जिसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने आखिरी सांस तक डटे रहने और पीछे न हटने का संकल्प दोहराया। इस भू-राजनीतिक टकराव से निवेशक आशंकित हैं।
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2. कच्चे तेल की कीमतों में 2% का उछाल: मिडिल ईस्ट में सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड 2% उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता दिखा।
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3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में ऐतिहासिक तेजी: अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी नोट्स पर यील्ड बढ़कर 5.2% के पार चली गई, जो वर्ष 2004 के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं 30-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 5.5% और 2-वर्षीय नोट्स की यील्ड 4.9% के ऊपर पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड में तेजी से जोखिम वाली इक्विटी मार्केट से निवेशक पैसा निकालकर डेट मार्केट की ओर रुख कर रहे हैं।
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4. रुपया ₹96 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर: विदेशी मुद्रा बाजार में भारी दबाव के बीच भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में 28 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.03 के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती लागत और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर भारी दबाव बनाया है।
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5. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की अनवरत बिकवाली: एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को अकेले ₹3,694 करोड़ के शेयर बेचे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के अनुसार, इस महीने एक्सचेंजों के जरिए इक्विटी से कुल ₹25,682 करोड़ की शुद्ध विदेशी पूंजी बाहर निकल चुकी है।
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6. वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत: दलाल स्ट्रीट पर एशियाई बाजारों की कमजोरी का सीधा असर दिखा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) लगभग 3% टूटा, चीन का शंघाई कंपोजिट करीब 2% गिरा और जापानी निक्केई में भी गिरावट दर्ज की गई।
🧭 दलाल स्ट्रीट के लिए आगे का परिदृश्य: एक्सपर्ट्स की राय और रणनीति
बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण:
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सपोर्ट लेवल टूटने से हावी हुए ‘बेयर्स’: जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, बाजार द्वारा अहम मनोवैज्ञानिक सपोर्ट स्तर तोड़ने के बाद मंदी के रुख वालों (Bears) का नियंत्रण मजबूत हुआ है, जो वैश्विक मैक्रो स्थितियों के बीच निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
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दीर्घकालिक सप्लाई बाधाओं की आशंका: सीजफायर का प्रयास विफल होने से पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक खिंचने और कमोडिटी की कीमतें ऊंची रहने का जोखिम गहरा गया है।
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ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंता: भारत-अमेरिका यील्ड स्प्रेड कम होने से विदेशी फंड्स की निकासी की रफ्तार बनी रह सकती है। साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं ने जोखिम का दायरा बढ़ा दिया है।
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आरबीआई पॉलिसी पर नजर: आगामी दिनों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौद्रिक नीति समिति के फैसले, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें और डॉलर इंडेक्स की दिशा ही बाजार का आगे का रुख तय करेंगे। निवेशकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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