MP-CG Health News: जांजगीर में जच्चा की मौत पर हंगामा, शव रखकर प्रदर्शन और तहसीलदार की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला मरीज की अचानक हुई मौत के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया और परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। मृतका के परिजनों ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला की नॉर्मल डिलीवरी (सामान्य प्रसव) हुई थी और डिलीवरी के ठीक बाद उसने सामान्य रूप से चाय और बिस्किट का सेवन भी किया था। परिजनों के मुताबिक उस समय तक सब कुछ बिल्कुल ठीक था, लेकिन 25 तारीख को अचानक महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। महिला ने अपने परिजनों को पेट में असहनीय दर्द होने की शिकायत की, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए।
🕒 24 को अस्पताल में भर्ती और 27 को हुई मौत: आईसीयू में शिफ्ट करने के बाद बिगड़ी हालत
परिजनों ने तत्काल इसकी सूचना ड्यूटी पर तैनात नर्स को दी और डॉक्टर को बुलाकर मरीज की जांच कराने की मांग की। ड्यूटी नर्स ने डॉक्टर की सलाह के बाद महिला को तुरंत आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर दिया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि तबीयत में सुधार होने के बजाय उसकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई। इसके बाद डॉक्टर के निर्देश पर नर्स ने महिला को एक इंजेक्शन लगाया, जिसके तुरंत बाद सरिता गंधर्व की हालत और ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उनका कहना है कि 27 तारीख को अस्पताल प्रबंधन द्वारा उन्हें यह दुखद सूचना दी गई कि उनकी मरीज की मौत हो चुकी है। जब अस्पताल ने शव सौंपने की बात कही, तो परिजनों ने यह कहते हुए शव लेने से साफ इनकार कर दिया कि यह मौत पूरी तरह से डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही का नतीजा है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
📢 परिजनों का फूटा गुस्सा: ‘नॉर्मल डिलीवरी के बाद सब ठीक था, गलत इंजेक्शन ने ली जान’
परिजनों के उग्र प्रदर्शन और बढ़ते आक्रोश को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा और लोगों को समझाने का प्रयास किया। मृतका के एक परिजन ने आपबीती बताते हुए कहा, “जिनकी मौत हुई है वो मेरी भाभी थीं। उनकी नॉर्मल डिलीवरी हुई थी, जिसके बाद उन्होंने चाय भी पी और बिस्किट भी खाए थे। सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन दर्द की शिकायत पर जब हमने डॉक्टर को बुलाया और उन्हें एक इंजेक्शन दिया गया, तो वह तुरंत बेसुध हो गईं। इसके बाद उन्हें आईसीयू में रखा गया, जहां काफी देर तक कोई भी डॉक्टर देखने नहीं आया। पुलिसकर्मी आए और हमसे कहने लगे कि लाश ले जाओ जो होना था वो हो गया, लेकिन अब हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस नवजात बच्चे का पालन-पोषण कैसे होगा?”
⚖️ तहसीलदार की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम, सिविल सर्जन ने दिए सफाई भरे बयान
परिजनों के भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बीच मृतका सरिता गंधर्व का पोस्टमार्टम एक महिला डॉक्टर द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषकर तहसीलदार की उपस्थिति में वीडियोग्राफी के साथ कराया गया। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि महिला की पुरानी जांच रिपोर्ट में शरीर में खून (हीमोग्लोबिन) की भारी कमी सहित कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं। उन्होंने कहा, “19 साल की यह महिला डिलीवरी के लिए अस्पताल आई थी, जिसके दोनों पैरों में सूजन थी और ब्लड व प्लेटलेट्स की भी शिकायत थी। उसे बेहतर इलाज के लिए बाहर भेजना जरूरी था, लेकिन मल्टीपल प्रॉब्लम्स के कारण उसकी स्थिति बहुत नाजुक हो गई थी। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। कोई भी इंजेक्शन गलत नहीं दिया जाता, बल्कि मरीज की मौजूदा हालत के हिसाब से दवाएं तय होती हैं।”
🏛️ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही सरकार, लेकिन अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
राज्य और केंद्र सरकारें देश में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) को कम करने के लिए लगातार ‘संस्थागत प्रसव’ (Institutional Delivery) को बढ़ावा दे रही हैं, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहें। लेकिन जिला अस्पताल जैसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित प्रसव के बाद भी जच्चा की जान न बचा पाना चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की एक बड़ी पोल खोलता है। हालांकि, पुलिस और अस्पताल प्रशासन का यही कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोप कितने सही हैं या कितने गलत।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.