चंडीगढ़: हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा बिजली निगमों की 1,134.54 करोड़ रुपये की फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (FSA) वसूली याचिका खारिज किए जाने पर पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने गहरा संतोष व्यक्त किया है।
उन्होंने इसे राज्य के करीब 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं के व्यापक हित में एक ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला करार दिया।
पूर्व मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिजली निगमों की अपनी सुस्ती, देरी और प्रशासनिक लापरवाही का अतिरिक्त आर्थिक भार किसी भी सूरत में प्रदेश के आम उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं डाला जा सकता।
🏛️ ‘कानून और समय-सीमा की अनदेखी बर्दाश्त नहीं’: आयोग के समक्ष तथ्यों के साथ दर्ज कराया था विरोध
नियामक आयोग में सुनवाई और पैरवी का घटनाक्रम:
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तथ्यों के साथ आपत्ति: प्रो. संपत सिंह ने बताया कि उन्होंने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली निगमों द्वारा दायर 1,134.54 करोड़ रुपये की इस अनुचित याचिका पर स्वयं कड़ा ऐतराज जताया था।
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मजबूत दलीलें पेश कीं: आयोग के समक्ष आयोजित जनसुनवाई में साक्ष्यों और वैधानिक नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने विरोध दर्ज कराया और कहा कि वितरण कंपनियां तय समय-सीमा और वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर मनमाने ढंग से वसूली नहीं कर सकती हैं।
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याचिका निरस्त: उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि आयोग ने उनकी दलीलों और जनहित के तर्कों को स्वीकार करते हुए बिजली निगमों की इस भारी-भरकम वसूली याचिका को सिरे से रद्द कर दिया।
⏱️ नवंबर 2025 की राशि जनवरी 2026 में हो चुकी थी लैप्स: फिर भी वसूली की हो रही थी कोशिश
वसूली के प्रयास में नियमों के उल्लंघन का ब्योरा:
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दोनों निगमों की लापरवाही: उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) द्वारा नवंबर 2025 से संबंधित एफएसए राशि को उपभोक्ताओं से वसूलने का प्रयास किया जा रहा था।
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नियमों के तहत जब्त राशि: यह राशि निर्धारित समय-सीमा के भीतर बिजली बिलों में शामिल नहीं की गई थी, जिसके चलते नियामक नियमों के तहत जनवरी 2026 में यह स्वतः लैप्स (जब्त) हो चुकी थी।
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जबरन वसूली का प्रयास रोका: इसके बावजूद निगमों द्वारा इसे वसूलने की अनुचित कोशिश की गई। आयोग द्वारा दोबारा वसूली की अनुमति न देना यह स्पष्ट संदेश है कि कंपनियों को तय समय-सीमा और कानूनी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
⚖️ नेगेटिव FSA का लाभ दबाए बैठी हैं कंपनियां: वित्त वर्ष 2027-28 की सुनवाई में जारी रहेगा संघर्ष
आगामी वित्तीय कार्ययोजना और जनहित के मुद्दे:
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2021 से लाभ नहीं मिला: प्रो. संपत सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 से उपभोक्ताओं को देय कई ‘नेगेटिव फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट’ (कटौती का लाभ) का फायदा नहीं दिया गया है, जिस पर सरकार और निगमों को अभी जवाब देना बाकी है।
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वार्षिक राजस्व प्राप्तियों (ARR) पर नजर: उन्होंने ऐलान किया कि वित्त वर्ष 2027-28 के अनुमानित ‘वार्षिक राजस्व प्राप्तियों’ की आगामी सुनवाई में उनका जनहित संघर्ष पूरी मजबूती से जारी रहेगा और निगमों को पिछले दरवाजे से बोझ डालने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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फिक्स्ड चार्ज और टैक्स कम कराने की लड़ाई: घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहे फिक्स्ड चार्ज, लगातार बढ़ते बिजली शुल्क और स्थानीय निकायों के टैक्स के भारी बोझ को आगामी सुनवाई में प्रमुखता से उठाया जाएगा ताकि सरकार इसकी समीक्षा करने पर बाध्य हो सके।
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