हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी राई के वीसी देंगे इस्तीफा: पूर्व आईपीएस अशोक कुमार ने हाईकोर्ट को दी जानकारी
चंडीगढ़: हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी राई के वाइस चांसलर (कुलपति) एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार आगामी तीन सप्ताह के भीतर अपने पद से औपचारिक इस्तीफा सौंप देंगे।
वीसी की ओर से यह महत्वपूर्ण जानकारी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रस्तुत की गई। पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार की कुलपति पद पर नियुक्ति की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अशोक कुमार ने अदालत को अवगत कराया कि वे व्यक्तिगत कारणों के चलते इस पद पर आगे बने रहने में असमर्थ हैं और अगले तीन हफ्तों के भीतर अपना त्यागपत्र सौंप देंगे।
⚖️ हाईकोर्ट ने निपटाई याचिका: 31 अक्टूबर तक प्रक्रिया पूरी करने के दिए निर्देश
अदालत का निर्णय और प्रशासनिक समय-सीमा:
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याचिका का निपटारा: वीसी अशोक कुमार द्वारा पद छोड़ने की लिखित सहमति दिए जाने के बाद जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने याचिका का विधिवत निपटारा कर दिया।
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समय-सीमा तय: हाईकोर्ट ने हरियाणा राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वीसी का इस्तीफा मिलने के एक सप्ताह के भीतर उसे स्वीकार किया जाए और 31 अक्टूबर 2026 तक इससे संबंधित सभी जरूरी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं।
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अशोक कुमार का सेवाकाल: अशोक कुमार नवंबर 2023 में उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) पद से सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके करीब चार माह बाद 1 मार्च 2024 को उन्हें हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का पहला पूर्णकालिक कुलपति नियुक्त किया गया था।
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पूर्व वीसी भी दे चुके हैं इस्तीफा: उल्लेखनीय है कि उनसे पहले पूर्व सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एस.एस. देशवाल भी अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
📜 नियुक्ति की योग्यता पर उठा था सवाल: UGC नियमों और प्रोफेसर अनुभव की अनदेखी का आरोप
याचिकाकर्ता की दलीलें और कानूनी विवाद का आधार:
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याचिकाकर्ता की पहचान: इस मामले को लेकर डॉ. देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। जब कुलपति ने कार्यभार संभाला था, तब डॉ. मोर विश्वविद्यालय में ‘कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन’ (परीक्षा नियंत्रक) के पद पर तैनात थे।
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यूजीसी नियमों का उल्लंघन: याचिका में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय को यूजीसी (UGC) से सशर्त मान्यता मिली है, जिसके तहत यूजीसी एक्ट के नियमों का पालन अनिवार्य है।
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प्रोफेसर का अनुभव जरूरी: नियमों के तहत वीसी पद के लिए कम से कम 10 वर्ष का प्रोफेसर के रूप में शिक्षण अनुभव होना अनिवार्य है, जबकि अशोक कुमार कभी प्रोफेसर नहीं रहे और न ही उनके पास पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि है।
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वेतन निर्धारण को चुनौती: याचिका में वीसी की नियुक्ति को अवैध घोषित कर रद्द करने के साथ-साथ 15 जुलाई 2024 के पत्र के जरिए उनके तय किए गए वेतनमान पर भी सवाल उठाए गए थे।
🛡️ पहला कुलपति नियुक्त करने के अधिकार पर बहस: अंतरिम व्यवस्था के तहत सीनियर डीन संभालेंगे कमान
अदालती बहस और यूनिवर्सिटी की नई व्यवस्था:
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सरकार के अधिकार का तर्क: अशोक कुमार के पक्ष से दलील दी गई थी कि विश्वविद्यालय के पहले कुलपति की नियुक्ति का विशेष अधिकार सरकार के पास सुरक्षित है।
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याचिकाकर्ता का प्रतिवाद: इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने तर्क रखा कि एक्ट में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि पहले कुलपति के तौर पर निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी न करने वाले किसी अयोग्य व्यक्ति को नियुक्त कर दिया जाए।
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सीनियर डीन संभालेंगे प्रभार: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कुलपति के इस्तीफा देने के बाद विश्वविद्यालय अधिनियम के नियम-2 के तहत जब तक नए और स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक विश्वविद्यालय के सबसे वरिष्ठ डीन अंतरिम कुलपति के रूप में प्रशासनिक दायित्व संभालेंगे।
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नियमों के तहत नए वीसी की नियुक्ति: अदालत ने हरियाणा सरकार को सख्त आदेश दिया है कि आगामी कुलपति का चयन यूजीसी और विश्वविद्यालय के वैधानिक नियमों के अनुरूप ही किया जाए।
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