Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से 1.70 करोड़ रुपये की लागत से हुआ निर्माण,शिक्षा-स्वास्थ्य और बाजार तक... Naghah Loh Dor Tradition: हाईवे के किनारे बिना कैमरे और कैशियर के बिकता है सामान, क्यूआर कोड से होता... Himachal Horticulture News: मौसम की मार से बागवान परेशान, बाजार में पहुंचे सिर्फ 1.15 करोड़ सेब के ब... Patna MLC Election News: मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ खोला मोर्चा, अनुज सिंह... UP News Today: बिजनौर के अमीखानपुर में 26 बीघा कृषि भूमि हथकंडे का मामला, एसपी केके बिश्नोई ने दी जा... Mumbai Manori Beach Accident: फंसे हुए विदेशी जहाज में गैस कटर से चोरी के दौरान चार की मौत, सनसनी Voter List Revision Maharashtra: बीएलओ के लिए नए नियम जारी, व्हाट्सऐप और घर-घर जाकर दस्तावेज स्वीकार... Amravati Road Accident News: शेगांव से दुर्गा मूर्ति लेकर वर्धा जा रही पिकअप गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, व... Ramanujnagar Police Station: आरोपी दामाद भजन सिंह गिरफ्तार, पारिवारिक विवाद में की थी खौफनाक वारदात Gandhi Jayanti Special: रायपुर के शुक्ला भवन और जैतूसाव मठ में रुके थे महात्मा गांधी, अस्पृश्यता निव...

Naghah Loh Dor Tradition: हाईवे के किनारे बिना कैमरे और कैशियर के बिकता है सामान, क्यूआर कोड से होता है पेमेंट

आधुनिक युग में जहां हर दुकान पर सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों और गार्ड्स का कड़ा पहरा होता है, वहीं भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मिजोरम में ईमानदारी और आपसी विश्वास की एक ऐसी अनूठी परंपरा देखने को मिलती है जो पूरी दुनिया को हैरान कर देती है। यहाँ ग्रामीण सड़कों और हाईवे के किनारे फल-सब्जियों की अनगिनत दुकानें ऐसी सजी मिलती हैं, जिन पर कोई दुकानदार मौजूद नहीं होता। स्थानीय मिजो भाषा में इन दुकानों को ‘नघाह लोह डॉर’ कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘बिना दुकानदार की दुकान’ होता है।

📦 सामान और कीमत की पर्ची के साथ रखा होता है बॉक्स, ग्राहक खुद पैसे डालकर ले जाते हैं जरूरत का सामान

इन खुली दुकानों पर हर सामान के दाम साफ-साफ लिखे होते हैं और उसके पास ही एक छोटा सा पैसे रखने का बॉक्स रखा रहता है। ग्राहक अपनी पसंद का सामान खुद चुनता है, उसकी तय कीमत गिनती है और पैसे बॉक्स में डालकर अपने रास्ते निकल जाता है। इन दुकानों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ सामान तौलने या बेचने के लिए कोई कैशियर नहीं बैठता और न ही सुरक्षा के लिए कोई सीसीटीवी कैमरा लगाया जाता है। किसान सुबह अपनी फसल सजाकर खेतों में काम करने चले जाते हैं।

📱 बदलते वक्त के साथ डिजिटल हुई परंपरा: कैश बॉक्स के साथ अब ऑनलाइन पेमेंट के लिए लगाए गए हैं QR कोड

ताज्जुब की बात यह है कि पिछले कई दशकों से इस व्यवस्था में कभी किसी चोरी या सामान गायब होने की शिकायत सामने नहीं आई है। कई बार तो ग्राहक तय कीमत से अधिक पैसे बॉक्स में छोड़ जाते हैं। हालांकि, बदलते वक्त के साथ इस पुरानी परंपरा में आधुनिक तकनीक का मेल भी हो गया है। अब पारंपरिक कैश बॉक्स के साथ-साथ कई जगहों पर डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड (QR Code) भी रख दिए गए हैं, जिससे साबित होता है कि आधुनिकता आने के बाद भी समाज का आपसी भरोसा आज भी पूरी तरह कायम है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.