उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में विजयादशमी (दशहरे) पर होने वाले रावण दहन को लेकर धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। शहर की चार प्रमुख दशहरा उत्सव समितियों के संयोजकों को एडवोकेट अश्विनी चौधरी के माध्यम से अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर रावण दहन किए जाने की परंपरा पर कड़ी आपत्ति जताई गई है और संबंधित समितियों से धार्मिक ग्रंथों के साक्ष्य के आधार पर प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग की गई है। साथ ही 7 दिनों के भीतर स्पष्ट जवाब न मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
📜 वाल्मीकि रामायण, पद्म और स्कंद पुराण का हवाला: ग्रंथों के अनुसार चैत्र माह में हुआ था रावण वध
अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक एवं अध्यक्ष महेश पुजारी की ओर से जारी इस नोटिस में वाल्मीकि रामायण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी घटनाओं की तिथियों का ब्योरा दिया गया है। नोटिस जारी करने वाले पक्ष का दावा है कि इन प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि रावण का वध आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को नहीं, बल्कि चैत्र कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। इसके अलावा रावण के चरित्र, उसके मोक्ष और भगवान श्रीराम के साथ युद्ध की धार्मिक व्याख्या पेश करते हुए प्रचलित परंपरा और ग्रंथों की तिथियों के बीच अंतर को स्पष्ट करने की मांग की गई है।
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