Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Haryana PGT Seniority List Revised: हरियाणा में दिव्यांग श्रेणी के 19 पीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता सू... Haryana Road Safety Initiative: हरियाणा में सड़क किनारे खड़े अनुपयोगी बिजली खंभों को हटाने का अभियान... HPSC HCS Final Result 2026: हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी, अभिषेक सरोहा ने किया टॉ... बेटी से छेड़खानी करने वाले का हाथ काटने वाले को 2 लाख का इनाम देंगे सांसद पप्पू यादव Kasganj Crime News: कासगंज में डेढ़ माह के मासूम बच्चे की खरीद-फरोख्त का खुलासा, मां समेत पांच आरोपी... Shiva Sharma Murder Case: लखनऊ में शिवा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे कर सकती है सरेंडर, पुल... कुरुक्षेत्र के पास जम्मू-कश्मीर जा रही बस पर पथराव, सीएम उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराजगी साधारण परिवार की बेटी से कैसे अंडरवर्ल्ड और माफिया के संपर्क में आई श्रद्धा दुबे? जानिए पूरी क्राइम ... आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग, जगन ने नायडू सरकार पर लगाया ‘जंगल राज’ का आरोप ग्वालियर सड़क हादसे पर सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन, सीएसपी हटाए गए और 3 थाना प्रभारियों समेत 8 पुलि...

Dhamtari Navratri Pandal: धमतरी में अनोखा दुर्गा पंडाल, एक ही जगह पर हो रहे हैं देश-विदेश के शक्तिपीठों के दर्शन

धमतरी: शारदीय नवरात्र पर्व के दौरान छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का एक अनोखा और भव्य पंडाल इन दिनों पूरे क्षेत्र में मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जालमपुर स्थित बालवीर दुर्गा उत्सव समिति ने इस बार एक ऐसा अद्भुत पंडाल तैयार किया है, जहाँ श्रद्धालु बिना किसी लंबी यात्रा के एक ही स्थान पर देश-विदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठों की मनमोहक झांकियों के दर्शन कर रहे हैं। यहाँ की अगाध आस्था, समृद्ध धार्मिक इतिहास और बेहद आकर्षक सजावट ने आने वाले हर एक शख्स का मन मोह लिया है। इस पंडाल की भव्यता ऐसी है कि इसे निहारने के लिए न सिर्फ स्थानीय लोग, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।

🗺️ एक ही पंडाल में विभिन्न देशों में स्थित शक्तिपीठों के दर्शन

इस पंडाल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को प्राचीन शक्तिपीठों से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं और माता सती के इतिहास की विस्तृत जानकारी मिलने लगती है। इसके लिए प्रवेश द्वार के आसपास विशेष और आकर्षक पोस्टर लगाए गए हैं। पूरे पंडाल को एक सुंदर गुफानुमा (Cave-like) स्वरूप दिया गया है, जिसके भीतर कदम रखते ही एक बेहद शांत, दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण का अहसास होने लगता है।

इसके बाद आगे बढ़ने पर अलग-अलग देशों और राज्यों में स्थित पावन शक्तिपीठों की जीवंत झांकियाँ देखने को मिलती हैं। प्रत्येक शक्तिपीठ के ठीक ऊपर एक विशेष बैनर लगाया गया है, जिसमें उस स्थान का नाम, उसकी भौगोलिक स्थिति, धार्मिक महत्व और पौराणिक मान्यताओं का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, ताकि दर्शन करने आने वाले लोग पूजा-अर्चना के साथ-साथ इन पवित्र स्थलों के बारे में ज्ञान भी प्राप्त कर सकें। इस पंडाल में मुख्य रूप से निम्नलिखित शक्तिपीठों के दर्शन हो रहे हैं:

  • श्रीलंका की मां शंकरी देवी

  • नेपाल की मां गुह्येश्वरी

  • बांग्लादेश की मां जेसोरेश्वरी

  • तिब्बत की मां मानसा

  • पाकिस्तान की मां हिंगलाज देवी

  • तेलंगाना की मां जोगुलम्बा

✨ ब्रह्मांड की थीम और कमल पर विराजित मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा

पंडाल के अंतिम और मुख्य हिस्से में ‘ब्रह्मांड की थीम’ पर आधारित बेहद आकर्षक और कलात्मक सजावट की गई है। यहाँ माँ जगदंबा की अति-भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। कमल पुष्प पर हवा में खड़ी नजर आने वाली माँ दुर्गा की इस प्रतिमा को विशेष और आधुनिक कलात्मक तरीकों से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी और शानदार सजावट के बीच माँ का यह अलौकिक रूप देखने वालों को अपनी ओर खींच रहा है।

⏰ समय और धन की बचत, 35 वर्षों से हो रही है मां की आराधना

पंडाल में दर्शन करने पहुँचने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में स्थित इन सभी शक्तिपीठों के प्रत्यक्ष दर्शन के लिए अलग-अलग जगहों की लंबी यात्रा करनी पड़ती है, जिसमें भारी मात्रा में समय और धन दोनों खर्च होते हैं। ऐसे में एक ही छत के नीचे देश-विदेश की कई देवियों के दर्शन करना उनके लिए एक बेहद सुखद और अविस्मरणीय अनुभव है। इस अनूठी अवधारणा की चर्चा अब सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच भी खूब हो रही है।

बालवीर दुर्गा उत्सव समिति, जालमपुर के सदस्यों ने बताया कि यह समिति पिछले 35 वर्षों से लगातार नवरात्र के पावन अवसर पर माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित करती आ रही है। हर साल समिति की तरफ से कुछ नया और विशेष करने का प्रयास किया जाता है। पिछले साल छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों की आराध्य देवियों की झांकी प्रस्तुत की गई थी, जबकि इस बार सात प्रमुख शक्तिपीठों को एक साथ प्रदर्शित करने का अनूठा निर्णय लिया गया। समिति के सदस्यों के अनुसार, इस भव्य परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए लगभग एक साल से तैयारी की जा रही थी। विभिन्न शक्तिपीठों के धार्मिक महत्व को गहराई से समझने के बाद इसका स्वरूप तय किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति और शक्तिपीठों के इतिहास से रूबरू कराना है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.