Balod Cyclone Arnab Crop Damage: बालोद में चक्रवात अर्नब का कहर, हजारों एकड़ में धान की फसल बर्बाद; किसानों पर पड़ी दोहरी मार
बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में चक्रवात ‘अर्नब’ का तांडव भले ही दो दिनों के बाद अब थम गया हो, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा ने यहाँ के अन्नदाताओं के चेहरों पर गहरी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बेमौसम भारी बारिश और अंधड़ के कारण जिलेभर में हजारों एकड़ भूमि पर लहलहाती और कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलें पूरी तरह से जमीन पर बिछ गई हैं। खेतों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है और धान की बालियां सड़ने के मुहाने पर पहुंच गई हैं। किसानों की यह मेहनत पानी में बहती नजर आ रही है।
खेतों में भरा दो से तीन फीट पानी, हार्वेस्टर मशीनों के न चलने से बढ़ा कटाई का संकट
बालोद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति यह हो चुकी है कि खेतों के भीतर दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। किसानों के लिए यह किसी दोहरी मार से कम नहीं है। एक तरफ जहाँ फसल गिरने की वजह से दानों के काले पड़ने और अंकुरित होकर खराब होने का खतरा पैदा हो गया है, वहीं दूसरी तरफ जलभराव और दलदली जमीन के कारण हार्वेस्टर या आधुनिक कटाई की मशीनें खेतों में नहीं उतर पा रही हैं। मजबूरी में किसानों को अपनी फसल कटवाने के लिए अब महंगे मजदूरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसके चलते कटाई की लागत तीन गुना तक बढ़ गई है।
प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं प्रभावित किसान, जल्द सर्वे कराने की मांग
यद्यपि चक्रवात का खतरा अब टल चुका है, परंतु इसके पीछे छोड़ा गया बर्बादी का मंजर अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। जिले के तमाम प्रभावित किसान अब उम्मीद भरी निगाहों से जिला प्रशासन और शासन की ओर देख रहे हैं। किसानों के मन में बस यही सवाल है कि आखिर राजस्व विभाग का मैदानी अमला कब तक उनके खेतों तक पहुंचेगा और नुकसान का सही एवं वास्तविक आकलन कब शुरू होगा।
मुआवजे और फसल बीमा की आस में किसान, पानी में डूबी फसलों को बचाने की जद्दोजहद
अन्नदाताओं का साफ तौर पर कहना है कि प्रशासन बिना किसी देरी के त्वरित औपचारिकताएं पूरी करे और युद्धस्तर पर ‘गिरदावरी’ तथा नुकसान का सर्वे कार्य संपन्न कराए, ताकि समय रहते फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा राहत कोष से मिलने वाली सहायता राशि उन तक पहुंच सके। वर्तमान में किसान बेहद तंगहाली और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं, क्योंकि उनकी फसलें पानी के सैलाब में पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं और उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है।
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