Women Empowerment: ताकि फिर कोई लड़की ‘निर्भया’ न बने; एक मां जो बच्चियों को बना रही ‘दुर्गा’, 1200 बेटियों को सिखाया मार्शल आर्ट
Mamta Sangte Ujjain: दिल्ली में हुए निर्भया कांड ने उज्जैन की ममता सांगते को इतना झकझोर दिया कि उन्होंने कुछ ऐसा करने का प्रण लिया, जिससे कि वह लड़कियों को इस डर से लड़ना सीखा सकें. उनका यह संकल्प इतना अडिग था कि ममता ने इसे पूरा करने मे काफी मेहनत की. अपने इस संकल्प को 14 वर्षो में पूरा करते हुए अब तक 1200 बच्चियों को मार्शल आर्ट और 300 महिलाओं को रोजगार की ट्रेनिंग दी है.
उनके इस काम को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सराहा था और उन्हें राज्य में विशिष्ट सेवा कार्य करने के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया सेवा सम्मान से सम्मानित किया. ममता सांगते ने बताया कि वर्तमान समय बहुत कठिन है. आज के समय में कभी भी कोई भी घटना घटित हो सकती है. इसीलिए अब युवतियों को खुद की सुरक्षा करना याद होना चाहिए.
1200 बच्चियों को निशुल्क मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग
ममता सांगते के मुताबिक, निर्भया कांड ही नहीं, बल्कि हमारे सामने और भी कहीं उदाहरण है जिसमें छोटी-छोटी बच्चियों, युवतियों और महिलाओं को अकेला देखकर उनके साथ क्रूरता की गई. इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए अब तक 1200 बच्चियों को निशुल्क मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया. वह बच्चियों को अपनी बेटी की तरह मानती हैं और वो भी उन्हें एक गुरू और मां के जैसा सम्मान देती हैं.
धार्मिक नगरी उज्जैन में 30 वर्षों से सेवा कार्य करने वाली समाजसेविका ममता सांगते की, जिन्होंने छोटी सी उम्र मे ही समाजसेवा के बड़े-बड़े मुकाम हासिल किए हैं. उनके द्वारा किए जाने वाले सेवा कार्य सिर्फ प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह देश की सीमा पर तैनात होकर रक्षा करने वाले सैनिक भाइयों को राखी बांधने से लेकर भूकंप, बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में अपनी टीम के साथ राहत कार्य करने के लिए सदैव तत्पर रहती है.
ममता की ओर से किए जाने वाले सेवा कार्यों की बात की जाए तो उत्तराखंड में आई बाढ़ हो या केरल में अतिवृष्टि से मची तबाही, हर प्राकृतिक आपदा के समय सांगते आपदाओं में बचाव दलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती नजर आती हैं. कश्मीरी पंडितों का दर्द बांटने के लिए जम्मू गईं और उन्हें नए कपड़े, राशन, कंबल और अन्य सामान दिए.
51 परिवारों के साथ मनाती हैं दीवाली
ममता सांगते संगिनी ग्रुप की अध्यक्ष भी हैं, जिन्होंने कोरोना काल के समय से 51 परिवारों का चयन किया जोकि आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है. इन परिवारों को प्रतिवर्ष दीपावली के समय एक शगुन की टोकरी दी जाती है, जिसमें मिठाई, नमकीन, लक्ष्मी जी के फोटो, पटाखों के साथ ही वह सभी सामग्री दी जाती है.
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