February 28, 2026 12:56 am
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दुर्ग जिला अस्पताल में जीवन रक्षक दवाओं की किल्लत, मरीजों को निजी मेडिकल भेजा जा रहा

दुर्ग: जिला अस्पताल में बीते कुछ दिनों से जीवन रक्षक और सामान्य इलाज में उपयोग की जाने वाली दवाओं की भारी कमी देखी जा रही है. ब्लड प्रेशर, शुगर और संक्रमण के इलाज में जरूरी कई दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं. मरीजों को मजबूरन निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है.

इन दवाओं की किल्लत: जानकारी के अनुसार अस्पताल में हाई ब्लड प्रेशर की दवा एम्लोडिपिन उपलब्ध नहीं है. 6 माह पहले इसकी कमी होने पर अस्थायी तौर पर एनालाप्रिल दवा दी गई थी. वहीं, शुगर के इलाज में प्रयोग की जाने वाली मेटफार्मिन 500 एमजी और गलीमेप्राइड 2 एमजी की दवाएं भी अलग-अलग नहीं मिल रही हैं. अस्पताल में केवल संयोजन दवा मेटफार्मिन 500 एमजी + गलीमेप्राइड 1 एमजी उपलब्ध है, जो सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं होती है. इसके चलते जिन मरीजों को अलग-अलग दवा की जरूरत होती है, उन्हें बाहर से खरीदने की सलाह दी जा रही है.
एंटीबायोटिक में भी कई ऑउट ऑफ स्टॉक: बड़ी बीमारी के अलावा सामान्य बुखार की दवा पैरासिटामॉल तक अस्पताल में उपलब्ध नहीं है. दर्द निवारक दवाओं में केवल डाइक्लोफिनेक साल्ट मिश्रित टैबलेट ही दी जा रही है. एंटीबायोटिक की श्रेणी में सिफेक्सिम 200, 400 एमजी और एमोक्सिलीन पोटैशियम क्लेवनेट 625 एमजी जैसी आवश्यक दवाएं भी स्टॉक से बाहर हैं.

50 से ज्यादा सर्जरी होती: अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 900 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, वहीं अलग-अलग विभागों नाक, कान, गला, आंख, हड्डी, डेंटल और सिजेरियन सहित 50 से अधिक सर्जरी प्रतिदिन की जाती हैं. ऐसे में एंटीबायोटिक दवाएं नहीं होने से मरीजों की रिकवरी में बाधा बन रही है.

सरकार की ओर से भेजी गई दवाएं ही मरीजों को उपलब्ध कराई जाती हैं. कुछ मरीज बाहरी दवाओं की मांग करते हैं, जो अस्पताल के स्टॉक में नहीं हैं– जिला नोडल अधिकारी डॉ. सी.बी.एस. बंजारे

हालांकि नोडल अधिकारी ने दावा किया कि आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं.

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