Noida Fire Department: सेक्टर-75 के हादसे के बाद एक्शन; 22 हजार लीटर का वाटर बाउजर और 72 मीटर का हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म
दिल्ली-एनसीआर के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लगातार 30, 40 या 50 मंजिलों वाली ऊंची-ऊंची रिहायशी और व्यावसायिक इमारतें (Highrise Buildings) खड़ी हो रही हैं. ऐसे में आम नागरिकों के मन में यह बड़ा सवाल उठता है कि अगर इन गगनचुंबी इमारतों के ऊपरी फ्लोर पर अचानक आग लग जाए, तो फायर ब्रिगेड किस तरह उस पर काबू पाता है? हाल ही में नोएडा के सेक्टर-75 की एक हाईराइज सोसाइटी में हुई आगजनी की घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो और भ्रामक चर्चाएं वायरल हुईं. इन सब के बीच, गौतम बुद्ध नगर के फायर विभाग का दावा है कि ऊंची इमारतों में भीषण आग से निपटने के लिए उसके पास विश्वस्तरीय आधुनिक उपकरण और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं. वर्तमान में पूरे जिले में नोएडा और ग्रेटर नोएडा को मिलाकर कुल 9 हाई-टेक फायर स्टेशन संचालित हैं, जहां 35 से अधिक फायर टेंडर और बड़े वाटर टैंकर मुस्तैद रहते हैं.
🚒 22 हजार लीटर की क्षमता वाला विशाल वाटर बाउजर: सेक्टर-2 मुख्य फायर स्टेशन पर तैनात हैं एडवांस रेस्क्यू गाड़ियां
नोएडा सेक्टर-2 स्थित मुख्य फायर स्टेशन को अत्याधुनिक गाड़ियों से लैस किया गया है. यहाँ वर्तमान में 5 हजार लीटर क्षमता के चार एडवांस वाटर टैंकर, 12 हजार लीटर का एक विशेष टैंकर और रिकॉर्ड 22 हजार लीटर क्षमता का एक विशाल वाटर बाउजर (Water Bowser) हर समय अलर्ट मोड पर रहता है. यह 22 हजार लीटर वाला वाटर बाउजर फिलहाल जिले की सबसे बड़ी क्षमता वाली लाइफ-सेविंग गाड़ियों में शामिल है. इसके साथ ही, विभाग का ‘कैलकुलेटर वाटर टावर’ भी हाईराइज बिल्डिंग में लगी भीषण आग को बुझाने में पूरी तरह सक्षम है. किसी भी गंभीर आपात स्थिति में फंसे लोगों को निकालने के लिए फायर फाइटर्स के पास एडवांस रेस्क्यू और ब्रेकिंग इक्विपमेंट भी मौजूद हैं.
🎥 कैमरे और मॉनिटर से लैस आर्टिकुलेटिंग वॉटर टावर: बिल्डिंग के हर कोने की लाइव मॉनिटरिंग कर फेंक सकता है पानी का प्रेशर
आधुनिक तकनीक की बात करें तो फायर ब्रिगेड का ‘कैलकुलेटर वॉटर टावर’ हाईराइज बिल्डिंग में आग बुझाने के लिए सबसे कारगर हथियार साबित हो रहा है. इसके ऊपरी हिस्से (नोजल) में विशेष थर्मल और एचडी कैमरे लगे होते हैं, जिनकी मदद से बिल्डिंग के किस फ्लोर और किस कमरे में आग धधक रही है, उसे नीचे खड़ी मशीन के मॉनिटरिंग सिस्टम पर लाइव देखा जा सकता है. अलग-अलग कैपेसिटी के वाटर टैंक से जोड़कर इसमें एक साथ 6 वॉटर नोजल लगाए जा सकते हैं, जिससे एक ही समय में भारी प्रेशर के साथ पानी की बौछारें सीधे आग के मुख्य हॉट स्पॉट पर मारी जा सकती हैं. नोजल के पास लगा कैमरा धुएं के बीच भी मशीन ऑपरेटर को स्क्रीन पर स्पष्ट रास्ता दिखाता है.
📊 गौतम बुद्ध नगर में फायर फाइटिंग की क्या है मुस्तैदी? जानिए जिले का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर
-
📍 फायर स्टेशन: पूरे जिले में कुल 9 अत्याधुनिक फायर स्टेशन कार्यरत हैं.
-
🚛 फायर टेंडर: किसी भी हादसे से निपटने के लिए 35 फायर टेंडर और वाटर टैंकर मुस्तैद हैं.
-
💧 वाटर बाउजर: सेक्टर-2 स्टेशन पर 22 हजार लीटर क्षमता का सबसे बड़ा वाटर बाउजर तैनात है.
-
🏗️ हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म: वर्तमान में 32 मीटर और 42 मीटर के हाइड्रोलिक रेस्क्यू प्लेटफॉर्म चालू हैं.
-
📈 अपग्रेडेशन: 72 मीटर ऊंचे नए हाइड्रोलिक रेस्क्यू प्लेटफॉर्म को खरीदने का प्रस्ताव अंतिम चरण में है.
-
🤖 आधुनिक तकनीक: ‘आर्टिकुलेटिंग वॉटर टावर’ और ‘थर्मल इमेजिंग कैमरे’ जैसी तकनीक से लैस है टीम.
-
⏱️ रिस्पांस टाइम: यदि सड़कों पर ट्रैफिक जाम की बाधा न हो, तो विभाग का रिस्पांस टाइम बेहद शानदार होने का दावा है.
🛡️ ‘बिल्डिंग का खुद का फायर सिस्टम है सबसे बड़ा हथियार’: 100 मीटर से ऊपर की आग पर काबू पाने का यही है एकमात्र तरीका
फायर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, किसी भी हाईराइज इमारत में आग बुझाने का पहला, सबसे त्वरित और महत्वपूर्ण हथियार खुद उस बिल्डिंग के अंदर बना ‘इन-बिल्ट’ फायर फाइटिंग सिस्टम होता है. नियमानुसार, हर ऊंची इमारत में हाई-प्रेशर पंप रूम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर, राइजर लाइन, होज पाइप, हाइड्रेंट सिस्टम और छतों पर बड़े फायर वाटर टैंक पहले से बने होते हैं. सेक्टर-75 की हालिया घटना में भी विभाग ने स्पष्ट किया कि आग पर पूरी तरह काबू पाने के लिए मुख्य रूप से बिल्डिंग के अंदर मौजूद इसी फायर फाइटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा, आग की वास्तविक स्थिति का सटीक पता लगाने के लिए ‘थर्मल इमेजिंग कैमरों’ (Thermal Imaging Cameras) का उपयोग किया गया, जो धुएं के पार भी आग के मुख्य स्रोत को ढूंढ निकालते हैं.
💰 आधुनिक मशीनों के लिए मिला ₹400 करोड़ का भारी बजट: विदेशों की तर्ज पर दिल्ली से सटे नोएडा का होगा कायाकल्प
फायर विभाग के मुताबिक, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण (YEIDA) द्वारा आधुनिक फायर उपकरणों और नई तकनीकों की खरीद के लिए करीब ₹400 करोड़ की भारी वित्तीय सहायता (फंड) उपलब्ध कराई गई है. इस भारी बजट के तहत देश-विदेश की सबसे उन्नत हाइड्रोलिक मशीनें, स्मोक एवैकुएटर, कॉम्बassigned रेस्क्यू टूल्स और हाईराइज फायर फाइटिंग रोबोट्स खरीदे जा रहे हैं. विभाग का कहना है कि दुनिया भर में लगभग 100 मीटर (करीब 30-32 मंजिल) तक की ऊंचाई पर ही बाहरी हाइड्रोलिक उपकरणों से प्रभावी फायर फाइटिंग की जा सकती है. इससे अधिक ऊंचाई पर भवन का आंतरिक सुरक्षा सिस्टम ही काम आता है. विभाग भविष्य में ऐसी विशेष वर्टिकल प्रेशर मशीनों पर भी काम कर रहा है, जो नीचे से ही गगनचुंबी इमारतों की सबसे ऊपरी छतों तक पानी को अत्यधिक वेग से पहुंचा सकें.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.