जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस ने पैरामेडिकल परीक्षा में बड़े स्तर पर नकल कराने की एक सोची-समझी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। नकल माफिया के इस नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए पुलिस ने दो अलग-अलग कॉलेजों से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में कॉलेज संचालक, एचओडी, लेक्चरर और संचालक का भतीजा शामिल हैं।
🕵️ क्या थी 5.5 लाख रुपये की पूरी साजिश?
पुलिस जांच में सामने आया है कि झुंझुनूं के एस. करण कॉलेज के प्रथम वर्ष के करीब 45 छात्रों को एक ही कमरे में बैठाने की योजना थी। इसके लिए छात्रों से करीब 5.5 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली गई थी। आरोपियों की योजना परीक्षा के दौरान अपनी पसंद का इनविजिलेटर नियुक्त कराने की थी, ताकि छात्रों को आसानी से नकल कराई जा सके। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अब तक लाखों रुपये का लेन-देन कर चुके थे।
📱 डिजिटल सबूतों से खुली पोल
पुलिस को इस मामले की जानकारी गोपनीय सूचना के जरिए मिली थी। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से डायरियां बरामद की हैं, जिनमें छात्रों के नाम और रुपयों का हिसाब दर्ज था। इसके अलावा, उनके मोबाइल फोन से मिली व्हाट्सएप चैट ने नकल की इस पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। चैट में एडमिट कार्ड और परीक्षा केंद्र से जुड़े गोपनीय दस्तावेज साझा किए गए थे।
🛑 राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल का बड़ा फैसला
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल ने कड़ा रुख अपनाया है। काउंसिल ने ‘प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज’ के परीक्षा केंद्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। जारी आदेश के अनुसार, कॉलेज में होने वाली DCLT, DDT और DECGT पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं अगले आदेश तक रद्द कर दी गई हैं।
⚖️ पुलिस की जांच जारी
डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के अनुसार, पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कितने लोग या शिक्षण संस्थान शामिल हैं। पुलिस इस गिरोह की हर कड़ी को जोड़ रही है ताकि परीक्षा प्रणाली को कलंकित करने वाले सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जा सके।
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