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Karwa Chauth 2026: अपनों से दूर भरतपुर के ‘अपना घर आश्रम’ में 212 मानसिक रूप से स्वस्थ महिलाएं रखेंगी व्रत, पतियों के नहीं लौटने का गम भी शामिल

भरतपुर: किसी के मन में अपने जीवनसाथी के वापस लौटने की अटूट उम्मीद है, तो कोई सुहागिन महिला बीते दिनों की धुंधली यादों के सहारे ही अपनी जिंदगी गुजार रही है। किसी को अपने गृहस्थी का आशियाना याद है, तो किसी के लिए अपनों के चेहरे भी अब वक्त के साथ केवल एक परछाई बनकर रह गए हैं। हालातों की मार ने इन महिलाओं को उनके परिवारों से बहुत दूर ला खड़ा किया है, लेकिन करवाचौथ के पावन पर्व से जुड़ी अगाध भावनाएं आज भी इनके दिल और दिमाग में पूरी तरह जिंदा हैं। राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित प्रतिष्ठित ‘अपना घर आश्रम’ में इस बार कुल 212 ऐसी महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ पतियों की दीर्घायु और सलामती के लिए व्रत रखेंगी। इस आयोजन का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इनमें से कई महिलाएं ऐसी हैं जिनके पतियों और परिजनों को उनकी सकुशल होने की आधिकारिक सूचना भिजवाई जा चुकी है, इसके बावजूद उनके अपने उन्हें घर वापस लेने के लिए आश्रम तक नहीं पहुंचे हैं।

‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज है दुनिया का यह सबसे बड़ा महिला आश्रय गृह

विश्व स्तर पर अपनी अनूठी पहचान रखने वाले ‘अपना घर आश्रम’ का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दुनिया के सबसे बड़े महिला आश्रय गृह के रूप में दर्ज है, जहाँ वर्तमान में कुल 3,643 महिलाएं आश्रय प्राप्त कर रही हैं। इनमें से 212 महिलाएं वे हैं जो चिकित्सा और देखरेख के बाद अब पूरी तरह से मानसिक रूप से स्वस्थ हो चुकी हैं। इसके बावजूद वे अपने अपनों के पास नहीं लौट सकी हैं। इन महिलाओं के लिए करवाचौथ के दिन सजने-संवरने और व्रत रखने का मतलब केवल एक पारंपरिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि उस टूटे हुए भावनात्मक रिश्ते को भीतर से जिंदा रखने की एक कोशिश है, जिससे उनकी जिंदगी कभी किसी दौर में जुड़ी हुई थी।

मानसिक रूप से अस्वस्थ 426 महिलाएं भी शामिल होंगी इस पावन आयोजन में

इस आश्रय गृह के अंदर करीब 426 ऐसी महिलाएं भी निवास कर रही हैं जो अभी तक पूरी तरह से मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हो पाई हैं। उनकी याददाश्त अब तक वापस नहीं लौट पाई है और वे अपने घर का पता तक ठीक से नहीं बता सकती हैं। इसके बावजूद वे करवाचौथ पर्व के महत्व को महसूस करती हैं और इस सामूहिक उत्सव में पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेंगी। आश्रम प्रबंधन के लिए इस तरह के बड़े आयोजन इन बेसहारा और लाचार महिलाओं के चेहरों पर थोड़ी सी खुशी लाने और उन्हें दुनिया में अपनेपन का अहसास कराने का एक बहुत बड़ा माध्यम साबित होते हैं।

छतीसगढ़ की कुमकुम को मिला परिवार का साथ, आश्रम से हर साल सैकड़ों लोग लौटते हैं अपने घर

आश्रम में रहने वाली महिलाओं के लिए घर वापसी की हर एक नई कहानी उन तमाम महिलाओं के मन में उम्मीद की नई किरण जगाती है, जो धीरे-धीरे मानसिक बीमारी से उबर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के महासमुंद जिले के कोकड़ी गांव की रहने वाली कुमकुम को करीब नौ महीने पहले कोटा क्षेत्र से रेस्क्यू करके इस आश्रम लाया गया था। प्रशासनिक अधिकारी बबीता द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद कुमकुम ने अपने घर का सही पता साझा किया, जिसके बाद उनके पति प्रमोद चौहान कुछ दिनों पहले उन्हें सुरक्षित अपने साथ घर ले गए। इस आश्रम में हर साल औसतन 500 लोगों को उनके परिवार से मिलाने में सफलता हासिल होती है। इस वर्ष भी अब तक कुल 448 लोगों का सफल पुनर्वास किया जा चुका है, जिनमें 338 महिलाएं शामिल हैं और इनमें से 105 सुहागिन महिलाएं अब अपने परिवार के बीच रहकर करवाचौथ का त्योहार मनाएंगी।

638 महिलाओं के श्रृंगार की जिम्मेदारी संभालेंगी 40 अनुभवी ब्यूटीशियन

इस विशेष पर्व को लेकर आश्रम परिसर के भीतर पिछले दो दिनों से युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं। लगभग 40 कुशल ब्यूटीशियनों की एक समर्पित टीम करीब 638 महिलाओं को पूरी खूबसूरती के साथ सजाने-संवारने के काम में जुटी हुई है। आश्रम की संस्थापिका डॉ. माधुरी भारद्वाज के अनुसार, इन सभी महिलाओं के मन में किसी न किसी रूप में अपने पति की याद या अपने घर-आंगन की सुहानी तस्वीरें बसी हुई हैं। यह पर्व उनके भीतर छिपी हुई संकुचित भावनाओं और दबे हुए अरमानों को बाहर लाने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। शाम को जब चांद आसमान में निकलेगा, तो इनमें से कोई महिला अपनों के लौटने की आस लगाए दुआ करेगी, तो कोई अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करेगी।

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