Cyclone Arnab Rapid Intensification: बंगाल की खाड़ी में खतरनाक रूप ले रहा चक्रवात ‘अर्णब’, वैज्ञानिकों को क्यों हैरान कर रहा है इसका तेजी से बदलना?
नई दिल्ली: मध्य अक्टूबर के दौरान एक ऐसा अनोखा साइक्लोन सामने आया जिसने दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों को गहरी चिंता में डाल दिया है। यह चक्रवात समुद्र के भीतर बहुत कम दूरी तय करने के बावजूद अत्यंत कम समय में एक सामान्य सिस्टम से सीधे एक भयंकर चक्रवात में तब्दील हो चुका था। मौसम विज्ञान और विज्ञान की तकनीकी भाषा में इस असाधारण प्रक्रिया को ‘रैपिड इंटेंसिफिकेशन’ (Rapid Intensification) के नाम से जाना जाता है।
महज 24 घंटे के भीतर तूफानी हवाओं की रफ्तार बढ़ने से हैरान रह गए स्थापित वेदर मॉडल
इस प्रक्रिया का सीधा अर्थ यह होता है कि जब कभी किसी तूफानी सिस्टम की हवाओं की गति महज 24 घंटे के छोटे से अंतराल में 65 किलोमीटर प्रति घंटे यानी 35 नॉट्स से भी ज्यादा तेजी से बढ़ने लगती है, तो स्थापित और पारंपरिक वेदर मॉडल भी फेल साबित होने लगते हैं। हालिया चक्रवात ‘अर्णब’ का समग्र व्यवहार इस बात का स्पष्ट प्रमाण देता है कि बंगाल की खाड़ी के भीतर अब मौसमी और पर्यावरणीय स्थितियां तेजी से और खतरनाक रूप से बदल रही हैं।
चक्रवात ‘अर्णब’ इतनी तेजी से कैसे हुआ इतना खतरनाक? वैज्ञानिकों ने बताई वजह
किसी भी समुद्री चक्रवात को अत्यधिक ताकतवर और विनाशकारी बनने के लिए विशाल मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो मुख्य रूप से उसे गर्म महासागरों से प्राप्त होती है। इस विषय पर पर्यावरण विशेषज्ञ राजेश सोलोमन पॉल का कहना है कि चक्रवात अर्णब जैसी घटनाएं इस बात को साबित करती हैं कि गर्म समुद्र की सतह, हवा के ऊर्ध्वाधर कतरन में कम उतार-चढ़ाव और अनुकूल वायुमंडलीय स्थितियां मिलकर किसी भी मामूली साइक्लोन को बेहद कम समय में अत्यंत विध्वंसक बना सकती हैं।
अत्याधुनिक तकनीक और एआई के बावजूद सटीक भविष्यवाणी करना आज भी क्यों है एक बड़ी चुनौती?
आज के इस आधुनिक दौर में इंसानी समाज के पास अत्याधुनिक सैटेलाइट्स, हाई-स्पीड सुपरकंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी बेहतरीन तकनीक मौजूद है, इसके बावजूद कोई तूफान अचानक किस वक्त खतरनाक रूप ले लेगा, इसका 100% सटीक पूर्वानुमान लगाना आज भी विज्ञान के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञ राजेश सोलोमन पॉल बताते हैं कि नए जमाने के उपग्रहों और उन्नत कंप्यूटर मॉडल्स के होने के बावजूद इसकी तीव्रता में होने वाले अचानक बदलाव के सटीक समय का अनुमान लगाना कठिन है, क्योंकि समुद्र और वायुमंडल की भौतिक स्थितियां हर पल बदलती रहती हैं। हालिया वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि गहरे समुद्र के भीतर की थर्मल एनर्जी का डेटा हर सेकंड बदलता रहता है। एआई और कंप्यूटर मॉडल पिछले ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर आकलन करते हैं, लेकिन जब महासागर अचानक उम्मीद से कहीं ज्यादा थर्मल एनर्जी बाहर छोड़ते हैं, तो तूफान कुछ ही घंटों के भीतर अपना मार्ग या अपनी विध्वंसक क्षमता बदल लेते हैं।
समुद्र की सतह से 50 से 100 मीटर नीचे छिपी गहराई की गर्मी से अपनी असली ताकत खींचते हैं तूफान
‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी’ और ‘भारतीय मौसम विज्ञान विभाग’ (IMD) के साझा शोध बताते हैं कि वर्ष 2000 के बाद से बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले लगभग 38% तूफान अचानक बहुत कम समय में बेहद खतरनाक रूप धारण कर लेते हैं, जबकि दुनिया के अन्य समुद्रों में यह औसत रफ्तार केवल 22% ही है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि वैज्ञानिक आमतौर पर केवल समुद्र की ऊपरी सतह के तापमान (SST) का आकलन करते हैं, जबकि कोई भी चक्रवात अपनी असली ऊर्जा समुद्र की सतह से 50 से 100 मीटर नीचे गहराई में छिपी गर्मी (Ocean Heat Content) से खींचता है। यही कारण है कि जब समुद्र के भीतर से अप्रत्याशित ऊर्जा बाहर आती है, तो चक्रवात की तीव्रता कई गुना बढ़ जाती है।
तटीय इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: चक्रवात-प्रतिरोधी और मजबूत मकान बनाने की जरूरत
पर्यावरण और भू-वैज्ञानिक राजेश सोलोमन पॉल का सुझाव है कि हम प्राकृतिक आपदाओं या तूफानों को उत्पन्न होने से रोक नहीं सकते, इसलिए विज्ञान, आधुनिक तकनीक और समय रहते की गई प्रशासनिक तैयारियों के माध्यम से ही जान और माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है। कंप्यूटर मैपिंग और सेंसर्स की मदद से पहले ही उन संवेदनशील डेंजर जोन्स (Red Zones) की सटीक पहचान करनी होगी जहां जलभराव या मकानों के गिरने का खतरा सबसे अधिक रहता है। इसके साथ ही, तटीय क्षेत्रों में ऐसे चक्रवात-प्रतिरोधी (Cyclone-Resistant) पक्के निर्माण करने होंगे जो 200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक वेग वाली हवाओं और तूफानी समुद्री लहरों का आसानी से मुकाबला कर सकें।
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