Rajesh Khanna Case Supreme Court Verdict: अनीता आडवाणी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, राजेश खन्ना के साथ रिश्ते को ‘शादी’ मानने की मांग खारिज
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में आज गुरुवार को भारतीय सिनेमा के पहले ‘सुपरस्टार’ कहे जाने वाले दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना से जुड़े एक चर्चित कानूनी मामले पर अहम सुनवाई संपन्न हुई। शीर्ष अदालत ने पूर्व अभिनेत्री और लेखिका अनीता आडवाणी की उस विशेष याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने लीजेंड्री एक्टर राजेश खन्ना के साथ अपने पूर्व संबंधों को कानूनी तौर पर ‘शादी’ के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग उठाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी कानूनी लड़ाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे एक “विलासितापूर्ण मुकदमा” (Luxury Litigation) करार दिया है।
याचिका पर विचार करने का कोई कानूनी आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच का सख्त रुख
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की संयुक्त पीठ द्वारा की गई। बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस याचिका पर आगे विचार करने या सुनवाई करने का कोई भी ठोस वैधानिक आधार नहीं बनता है। याचिकाकर्ता अनीता आडवाणी की पैरवी कर रहे वकील ने दलील दी थी कि दीवानी मुकदमे (Civil Suit) के जरिए वे केवल अपने सम्मान की घोषणा और गरिमा की भावना चाहती हैं। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के उस पिछले आदेश को पूरी तरह से बरकरार रखा, जिसमें एक अप्रैल को उनकी याचिका को पहले ही खारिज कर दिया गया था। इसके साथ ही, सेशंस कोर्ट के वर्ष 2017 के उस आदेश पर भी मुहर लग गई है जिसमें जुलाई 2012 में 69 वर्ष की आयु में राजेश खन्ना के निधन के बाद शुरू हुई इस कानूनी कवायद को नामंजूर कर दिया गया था।
लंबे समय से चल रहे लिव-इन रिलेशनशिप के दावों और कानूनी जंग का हुआ औपचारिक अंत
अनीता आडवाणी का यह दावा रहा है कि वह दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ उनके अंतिम समय तक कई वर्षों तक ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ में साथ रहीं थीं। वर्ष 2012 में जब राजेश खन्ना का निधन हुआ, तब उनके परिवार यानी उनकी अलग रह रही पत्नी डिंपल कपाड़िया, बेटी ट्विंकल खन्ना और दामाद अक्षय कुमार ने उन्हें मुंबई के बांद्रा स्थित मशहूर बंगले ‘आशीर्वाद’ से बाहर कर दिया था। इसके बाद, साल 2013 में अनीता ने ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005’ (DVA) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट अदालत में डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने मासिक गुजारा भत्ता और बांद्रा में एक फ्लैट की मांग रखी थी। सुप्रीम कोर्ट के आज के इस फैसले के साथ ही उस लंबी कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है, जिसे आडवाणी पिछले एक दशक से अधिक समय से राजेश खन्ना के साथ अपने संबंधों को आधिकारिक मान्यता दिलाने के लिए लड़ रही थीं।
हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यह घरेलू हिंसा अधिनियम के दायरे में आने वाला मामला नहीं है
पूर्व में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि राजेश खन्ना के साथ आडवाणी का रिश्ता पारंपरिक या कानूनी रूप से शादी की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए वह घरेलू हिंसा कानून के प्रावधानों के तहत किसी भी तरह की कानूनी राहत पाने की हकदार नहीं हैं। अदालत ने यह भी माना था कि खन्ना परिवार के अन्य सदस्यों को इस विवाद में नहीं घसीटा जा सकता क्योंकि आडवाणी कभी उनके साथ एक छत के नीचे नहीं रहीं। अनीता आडवाणी ने अपने करियर की शुरुआत साल 1978 में फिल्म “शालीमार” से की थी और बाद में कुछ अन्य फिल्मों व रियलिटी शो में भी नजर आई थीं। हालांकि, कानूनी दांव-पेच और अदालती लड़ाइयों के बीच उन्होंने कुछ साल पहले राजेश खन्ना की यादों पर आधारित एक संस्मरण भी लिखा था, लेकिन अदालती मोर्चे पर उन्हें अब सर्वोच्च अदालत से करारा झटका लगा है।
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