Balrampur Checkdam Corruption Action: बलरामपुर में चेकडैम निर्माण में धांधली पर कलेक्टर चंदन त्रिपाठी का कड़ा एक्शन, संविदा कर्मी बर्खास्त और 9.13 लाख की वसूली
बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के भीतर शासकीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने अब बेहद सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं। जिले में चेकडैम के निर्माण कार्य के दौरान सामने आई गंभीर वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के सख्त निर्देशों के बाद जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ ताबड़तोड़ और कड़ी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत एक संविदा तकनीकी सहायक की सेवा समाप्त कर दी गई है, लगभग 9.13 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि वसूलने के निर्देश दिए गए हैं तथा संबंधित 17 निर्माण कार्यों के भुगतानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
शिकायत और जांच प्रतिवेदन के आधार पर हुई कार्रवाई, मुख्य तकनीकी परीक्षक की जांच में सामने आईं तकनीकी खामियां
सामने आई जानकारी के मुताबिक, बलरामपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चेकडैम निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी और गुणवत्ताहीन कार्य किए जाने की कई शिकायतें जिला प्रशासन को प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों को बेहद गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने राज्य कार्यालय के विशेष निर्देशों के तहत मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) से कुल 17 चेकडैम निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराई। जब इस उच्चस्तरीय जांच का प्रतिवेदन सामने आया, तो उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुछ निर्माण स्थलों पर कंक्रीट की गुणवत्ता बेहद घटिया पाई गई और उप-संरचनाओं (सब-स्ट्रक्चर) के निर्माण में गंभीर तकनीकी कमियां उजागर हुईं। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी विशेष तौर पर उल्लेख किया गया कि घटिया कंक्रीट की सतह को छिपाने के लिए उस पर केवल ऊपरी तौर पर प्लास्टर कर दिया गया था।
9.13 लाख रुपए की वसूली के निर्देश, अनियमितता पाए जाने पर जनपद राजपुर के तकनीकी सहायक की संविदा सेवा समाप्त
जांच प्रक्रिया के दौरान जब इन निर्माण कार्यों का मूल्यांकन किया गया, तो कार्यों का अत्यधिक मूल्यांकन (ओवर-वैल्यूएशन) पाया गया। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को आधार बनाते हुए तकनीकी सहायक रोहित कुमार, अविनाश भारती और कृपाशंकर गुप्ता से संयुक्त रूप से 9.13 लाख रुपए की राशि वसूलने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके साथ ही, व्यापक अनियमितता और लापरवाही का दोषी पाए जाने के कारण जनपद पंचायत राजपुर में पदस्थ तकनीकी सहायक रोहित कुमार की संविदा सेवा को 30 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।
17 चेकडैम निर्माण कार्यों का भुगतान रोका गया, अन्य कर्मचारियों पर भी लगाया गया अर्थदंड और चेतावनी
इस जांच के दायरे में आने वाले कुल 17 चेकडैम निर्माण कार्यों के सभी प्रकार के भुगतानों को अग्रिम आदेश तक रोक दिया गया है। रोके गए इन कार्यों में से 12 निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर के अंतर्गत आते हैं, जबकि शेष 5 कार्य जनपद पंचायत राजपुर क्षेत्र से संबंधित हैं। इसके अतिरिक्त, तकनीकी सहायक अविनाश भारती और कृपाशंकर गुप्ता पर महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम 2005 की धारा 25 के प्रावधानों के तहत एक-एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। साथ ही, दोनों कर्मचारियों को भविष्य के लिए अंतिम चेतावनी पत्र भी जारी किया गया है।
पर्यवेक्षण में लापरवाही पर वरिष्ठ अधिकारियों को थमाए गए कारण बताओ नोटिस, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश
इस पूरे प्रकरण में केवल मैदानी कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि कार्यों की निगरानी करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की पर्यवेक्षण (सुपरविजन) की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इसी क्रम में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर के कार्यपालन अभियंता सच्चिदानंद कांत और उप संभाग राजपुर के अनुविभागीय अधिकारी (SDO) जानूराम सोनवानी को स्पष्टीकरण हेतु कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही, जनपद पंचायत राजपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) संजय दुबे और कार्यक्रम अधिकारी मानसाय सिदार से भी इस मामले में जवाब तलब किया गया है।
‘शासकीय कार्यों में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं’: कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने दोहराई प्रतिबद्धता
इस पूरे मामले पर अपना कड़ा रुख स्पष्ट करते हुए जिला कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिले के भीतर किसी भी शासकीय योजना, मद या विभाग के अंतर्गत होने वाले निर्माण कार्यों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करना पूरी तरह अनिवार्य है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि “किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी या किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार बेहद कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिला प्रशासन की मुख्य प्राथमिकता केवल कागजों पर निर्माण कार्य पूरा कराना नहीं है, बल्कि ऐसी मजबूत और टिकाऊ परिसंपत्तियां तैयार करना है जिनका सीधा और दीर्घकालिक लाभ ग्रामीण अंचल के नागरिकों को मिल सके।” कलेक्टर ने यह भी चेतावनी दी है कि भविष्य में भी विकास कार्यों की नियमित और औचक निगरानी जारी रहेगी, और दोषी पाए जाने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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