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Shahdol Drone Didi Success Story: शहडोल की किसान महिलाओं ने बदली खेती की तस्वीर, ड्रोन उड़ाकर और मशीन चलाकर कमा रहीं बढ़िया मुनाफा

शहडोल: मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल शहडोल जिले से ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठी तस्वीर सामने आई है। जिले के बुढ़ार विकासखंड अंतर्गत आने वाले भटिगवां खुर्द गांव की निवासी किसान दीदियां अपनी मेहनत और आधुनिक सोच के दम पर समाज में एक नई मिसाल कायम कर रही हैं। यहाँ कोई महिला आसमान में ड्रोन उड़ाकर खेतों में कीटनाशक का छिड़काव कर रही है, तो कोई कृषि यंत्रों के जरिए अपनी आजीविका को मजबूत बना रही है। हाल ही में जब जिले के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने अचानक भटिगवां खुर्द गांव का दौरा किया, तो इन ग्रामीण महिलाओं के अद्भुत कौशल और उनके आजीविका संबंधी कार्यों को देखकर वे भी खासे प्रभावित हुए और उनकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

इंदौर से ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण लेकर जिले की पहली ‘ड्रोन दीदी’ बनीं शकुंतला, कलेक्टर के सामने किया शानदार प्रदर्शन

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने और उन्हें कृषि के क्षेत्र में तकनीकी रूप से सक्षम करने के उद्देश्य से कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने भटिगवां खुर्द गांव पहुंचकर किसान दीदियों से सीधी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने महिलाओं द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों, जैसे कि ड्रोन के माध्यम से खेतों में उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव की प्रक्रिया को बहुत बारीकी से देखा। गांव की प्रतिभावान किसान दीदी शकुंतला ने कलेक्टर के समक्ष अपने संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से विशेष रूप से ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शकुंतला ने मौके पर ही ड्रोन के माध्यम से फसल पर कीटनाशक के छिड़काव का जीवंत प्रदर्शन भी करके दिखाया। उन्होंने बताया कि वे इस तकनीक के जरिए न केवल अपने खेतों का काम आसान कर रही हैं, बल्कि आसपास के किसानों के खेतों में छिड़काव कर अच्छी खासी कमाई भी कर रही हैं। कलेक्टर ने उनकी इस अनूठी पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और उन्हें आधुनिक तकनीक का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

ई-ऑटो रिक्शा और रीपर मशीन से संवर रही है महिलाओं की आर्थिक स्थिति, हर दिन हो रही है बेहतरीन कमाई

इस गांव में केवल ड्रोन दीदी ही नहीं, बल्कि अन्य महिलाएं भी पारंपरिक कार्यों से हटकर नए रास्ते अपना रही हैं। गौरी सिंह नामक महिला ई-ऑटो रिक्शा का सफलतापूर्वक संचालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ई-ऑटो चलाने से उन्हें प्रतिदिन लगभग 500 रुपए तक की निश्चित आय प्राप्त हो जाती है। इसके अतिरिक्त, चंद्रवती सिंह नामक महिला फसल की कटाई के लिए आधुनिक ‘रीपर मशीन’ (Reaper Machine) का उपयोग कर रही हैं। वे न केवल अपने खेतों में बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अन्य किसानों को भी रीपर मशीन की सुविधा प्रदान करके अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं, जो ग्रामीण स्तर पर बढ़ती व्यावसायिक सोच को दर्शाता है।

कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने की किसान दीदियों के प्रयासों की सराहना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर दिया जोर

क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान जब कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने इन ग्रामीण महिलाओं के कार्यों को नजदीक से देखा, तो वे उनके जज्बे से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने महिलाओं के इन प्रयासों की भरपूर सराहना करते हुए कहा कि ये महिलाएं न केवल खुद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने आसपास की अन्य महिलाओं को भी आयमूलक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें रोजगार के नए अवसर दिलाने में मदद कर सकती हैं। कलेक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के कौशल और उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है।

ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि के लिए बकरी पालन को दिया जा रहा बढ़ावा, स्वीकृत किए जाएंगे विशेष शेड

ग्रामीण परिवारों की आय के स्रोतों को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में प्रशासन ने कदम बढ़ाते हुए बकरी पालन गतिविधि को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके तहत संबंधित जनपद पंचायत के माध्यम से प्राथमिक चरण में 10 चयनित महिला हितग्राहियों के लिए बकरी पालन शेड स्वीकृत किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की योजना है कि जरूरत और पात्रता के आधार पर इस कल्याणकारी योजना का भविष्य में और विस्तार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को लाभांवित किया जा सके और उनकी आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

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