नीरज फाउंडेशन स्कूल का वार्षिकोत्सव सम्पन्न

# बच्चों में संस्कृति का बीजारोपण सराहनीय-शशिमोहन सिंह*
पत्थलगांव–/ बच्चों में संस्कृति का बीजारोपण सराहनीय है। बाल आयु में ही बच्चों को इससे न सिर्फ अवगत कराना अपितु उन्हें इसे आत्मसात करने के लिए प्रेरित करने की पहल संस्था की यह अनूठी पहल है, यह बातें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने नीरज फाउंडेशन स्कूल के वार्षिकोत्सव में कहीं।
नीरज फाउंडेशन स्कूल के द्वारा संचालिका हरनीश कौर और संचालक हरप्रीत भाटिया के मार्गदर्शन में मंगलवार को अग्रसेन भवन में वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। वहीं हरजीत सिंह भाटिया, अनिल अग्रवाल, विजय त्रिपाठी, सुरेन्द्र चेतवानी, प्रवीण गर्ग, गुरुशरण भाटिया, रमेश टेटे, नीरज गुप्ता, जितेंद्र अग्रवाल, सतविंदर भाटिया, श्याम चौहान, अभिषेक शुक्ला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। माता सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर इसकी शुरुआत की गई।
कक्षा नर्सरी से पांचवीं तक संचालित स्कूल के सैकड़ों बच्चों ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान माता काली और रक्तबीज के संघर्ष और असुर के माता द्वारा संहार को नृत्यनाटिका के रूप में प्रस्तुत किया गया। कक्षा 3 से पांच तक के नन्हे बच्चों ने इसका इतना सजीव और भावपूर्ण चित्रण किया कि इसने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। वहीं इसकी अगली कड़ी में कक्षा 1 के बच्चियों ने भारतीय संस्कृति पर आधारित गीत संगीत पर अद्भुत लयबद्ध प्रस्तुति दी। उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ ही बच्चों की वेश भूषा के भी भारतीय संस्कृति के साथ ताल मेल ने इसमें उल्लेखनीय वृद्धि की। मुख्यअतिथि शशिमोहन सिंह ने बच्चों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की।
उन्होंने कहा कि बाल मस्तिष्क गीली कोमल मिट्टी के समान होता है, इसमें आप जो चाहें चित्र उकेर सकते हैं।बच्चे अपनी बाल्यकाल का महत्वपूर्ण समय स्कूल में ही शिक्षकों के सान्निध्य में गुजारते हैं। ऐसे में उनके जीवन को दिशा देने में शिक्षकों और स्कूल की भूमिका प्रभावकारी स्थान रखती है। एन एफ एस स्कूल के बच्चों की प्रस्तुतियों से ऐसा प्रतीत हुआ मानो छोटे छोटे बच्चे देवदूत की शक्ल में मंच पर उतर आए हों। उन्होंने कहा कि रंगमंच पर प्रस्तुति में सिर्फ वेशभूषा ही नहीं बल्कि चेहरे की भाव भंगिमा का भी विशेष महत्व होता है और चेहरे पर यह भाव तब नजर आता है जब यह भीतर से उत्पन्न हो। और इस दृष्टि से भी स्कूल ने उत्कृष्टता प्रदर्शित की है। उन्होंने स्कूल के बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम के समापन पर बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए गए वहीं संचालक द्वय हरनीश कौर तथा हरप्रीत भाटिया ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
*सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां*
वार्षिकोत्सव में एन एफ एस स्कूल के नर्सरी से कक्षा 5 तक के बच्चों के द्वारा 20 से भी अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इनमें से ज्यादातर भारतीय संस्कृति पर आधारित रहे। इनमें न सिर्फ वेश भूषा में संस्कृति की छटा बिखरती रही बल्कि छोटे बच्चों ने आपसी तालमेल और भाव भंगिमा तक का ध्यान रखा।सभी कार्यक्रमों को दर्शकों का जमकर प्रतिसाद मिला। लोगों ने संस्कृति आधारित कार्यक्रमों के चयन और प्रस्तुतीकरण के लिए स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की सराहना की।





